न्यायमूर्ति वर्मा: नकदी की बरामदगी से लेकर इस्तीफे तक का घटनाक्रम
न्यायमूर्ति वर्मा: नकदी की बरामदगी से लेकर इस्तीफे तक का घटनाक्रम
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) विवादों में घिरे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे उनके खिलाफ जारी महाभियोग की कार्यवाही निष्प्रभावी हो गई है।
पिछले साल न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से जली हुई नोटों की गड्डियां बरामद होने के बाद से वह आलोचनाओं का सामना कर रहे थे।
इस मामले से संबंधित घटनाक्रम निम्नलिखित है:
*14 मार्च, 2025: राष्ट्रीय राजधानी के तुगलक क्रिसेंट स्थित न्यायाधीश के आधिकारिक बंगले में रात लगभग 11 बजकर 35 मिनट पर आग लग गई, जिसके बाद आग बुझाने के दौरान जले हुए नोटों के बंडल बरामद हुए।
*15 मार्च: दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिकारियों ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों पर घटना स्थल का निरीक्षण किया।
*17 मार्च: दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना से मुलाकात की।
*20 मार्च: दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने प्रधान न्यायाधीश के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा किए।
*21 मार्च: प्रधान न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति वर्मा से 22 मार्च की दोपहर से पहले लिखित में जवाब मांगा। उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने पर विचार किया।
*22 मार्च: न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोपों का खंडन किया। प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने न्यायमूर्ति वर्मा के विरुद्ध आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। उच्चतम न्यायालय ने मामले से संबंधित तस्वीरों और वीडियो समेत आंतरिक जांच रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड की।
*28 मार्च: न्यायमूर्ति वर्मा का तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया। उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि न्यायमूर्ति वर्मा को न्यायिक कार्य न सौंपा जाए।
* 3 मई: उच्चतम न्यायालय की समिति ने न्यायाधीश को कदाचार का दोषी पाया, पद से हटाने की सिफारिश की।
* 8 मई: तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति वर्मा के पद छोड़ने से इनकार करने पर उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की मांग की।
*17 जुलाई: न्यायमूर्ति वर्मा ने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य ठहराने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
*23 जुलाई: न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय में उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
*30 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने न्यायाधीश की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
*7 अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका खारिज की।
*12 अगस्त: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए बहुदलीय प्रस्ताव स्वीकार किया।
*16 दिसंबर: उच्चतम न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति के गठन को चुनौती दी थी।
*16 जनवरी, 2026: उच्चतम न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानून के किसी प्रावधान का इस्तेमाल संसदीय कार्यवाही को बाधित करने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता है।
*9 अप्रैल: न्यायमूर्ति वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
भाषा
देवेंद्र वैभव
वैभव

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