उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश नीति सख्ती से लागू करेगी कर्नाटक सरकार

उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश नीति सख्ती से लागू करेगी कर्नाटक सरकार

उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश नीति सख्ती से लागू करेगी कर्नाटक सरकार
Modified Date: April 17, 2026 / 03:12 pm IST
Published Date: April 17, 2026 3:12 pm IST

बेंगलुरु, 17 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सरकार सभी क्षेत्रों में सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश नीति को जल्द से जल्द सख्ती से लागू करेगी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक इस संबंध में प्रस्तावित कानून औपचारिक रूप से नहीं ले लेता, तब तक वह मासिक धर्म अवकाश नीति का ‘‘सख्ती से और पूरी ईमानदारी’’ के साथ पालन सुनिश्चित करे।

लाड ने कहा, ‘‘हमारी राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मासिक धर्म अवकाश नीति के समर्थन में कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देश का मैं स्वागत करता हूं।’’

उन्होंने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर लिखा कि राज्य सरकार ने मासिक धर्म अवकाश नीति को व्यापक रूप से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और यह देश के लिए एक आदर्श है।

उन्होंने कहा, ‘‘अदालत की इस राय के अनुरूप कि मासिक धर्म अवकाश महिलाओं की गरिमा, न्याय और उनकी वास्तविकताओं की मानवीय मान्यता का मामला है, हम सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश नीति को सभी क्षेत्रों में जल्द से जल्द सख्ती से लागू करेंगे जिसमें हर महीने एक दिन या साल में 12 दिन अवकाश का प्रावधान है।’’

अदालत ने कहा था कि राज्य की जिम्मेदारी होगी कि वह उपयुक्त दिशानिर्देश, परिपत्र और प्रशासनिक निर्देश जारी कर नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना सुनिश्चित करे, ताकि सभी क्षेत्रों में इसका एकसमान, निरंतर और सख्त पालन हो सके।

अदालत ने यह निर्देश बेलगावी जिले में मुदलगी के एक होटल में काम करने वाली 41 वर्षीय चंद्रव्वा हनुमंत गोकवी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में 20 नवंबर, 2025 के उस सरकारी आदेश को लागू करने का अनुरोध किया गया, जिसमें सभी कामकाजी महिलाओं को एक दिन का मासिक धर्म अवकाश देने का प्रावधान है।

भाषा

सिम्मी राजकुमार

राजकुमार


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