केरल: पूर्व भाजपा नेता ने आईयूएमएल के समर्थन से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता
केरल: पूर्व भाजपा नेता ने आईयूएमएल के समर्थन से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता
कासरगोड, छह मई (भाषा) केरल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में संदीप वारियर की यात्रा ने बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान खींचा है।
वारियर कुछ साल पहले तक राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ परिवार के प्रमुख चेहरों में से एक थे। टेलीविजन चैनलों पर होने वाली बहसों में उन्हें तेज-तर्रार एवं आक्रामक अंदाज में कांग्रेस और उसकी सहयोगी आईयूएमएल (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) पर निशाना साधते तथा अपनी पार्टी के पक्ष को जायज ठहराते देखा जा सकता था।
आज, वारियर की राजनीतिक स्थिति बिल्कुल जुदा है।
नवंबर 2024 में कांग्रेस में शामिल होने के लगभग डेढ़ साल बाद वारियर कासरगोड जिले की त्रिकारीपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। यह निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का गढ़ बना हुआ था।
वारियर ने त्रिकारीपुर सीट पर कुल 83,109 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एवं माकपा उम्मीदवार मुस्तफा को 4,431 मतों के अंतर से हराया।
त्रिकारीपुर सीट का अपना एक इतिहास भी है। एक समय में इसका प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री ईके नैयनार ने किया था।
जीत के बाद वारियर ने संवाददाताओं से बातचीत में आईयूएमएल नेतृत्व, खास तौर पर पार्टी प्रमुख पनाक्कड़ सादिक अली शिहाब थंगल से मिले समर्थन के लिए उनका आभार जताया।
वारियर ने कहा, “जब मेरी उम्मीदवारी की घोषणा की गई, तो थंगल ने कहा कि मैं सिर्फ कांग्रेस का ही नहीं, बल्कि आईयूएमएल का भी उम्मीदवार हूं। इतना ही नहीं, वह खुद यहां आए और मेरे पक्ष में प्रचार किया।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला के मुताबिक, आईयूएमएल ने वारियर की उम्मीदवारी की घोषणा से पहले ही उनका समर्थन किया था।
चेन्निथला ने कहा, “उन्होंने (आईयूएमएल नेतृत्व) खास तौर पर वारियर का नाम लिया और कहा कि वे निर्वाचन क्षेत्र में उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे। इसलिए, यह कांग्रेस और यूडीएफ का सोचा-समझा फैसला था।”
वारियर ने दावा किया कि सभी धर्मों के नेताओं ने त्रिकारीपुर में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को जिताने की अपील की, जिससे यूडीएफ को वाम दलों के गढ़ में सेंध लगाने में मदद मिली।
उन्होंने कहा, “यह मतदान के रुझान से स्पष्ट है। हमें सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का समर्थन मिला।”
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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