कोझिकोड (केरलम), 28 अगस्त (भाषा) केरलम के प्रमुख इस्लामी विद्वानों के एक संगठन ने धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों से अपील की है कि वे इस्लामी नियमों का सख्ती से पालन करें और सार्वजनिक सड़कों तथा मंचों पर युवा महिलाओं को ऐसे पुरुषों के बीच लाने से बचें, जिनसे उनका कोई पारिवारिक संबंध नहीं है। इस अपील पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
राज्य में सुन्नी-शाफई इस्लामी विद्वानों की प्रमुख परिषद ‘समस्त केरल जमीयतुल उलेमा’ के कंथापुरम गुट ने कहा कि धार्मिक उत्सव और कार्यक्रमों निर्धारित सीमाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
हाल ही में जारी एक बयान में समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार ने लोगों से अपील की कि धार्मिक सीमाओं का उल्लंघन करके आयोजित किए जा रहे इस्लामी उत्सवों और समारोहों की किसी भी घटना को गंभीरता से लें।
नेताओं ने विशेष रूप से कहा कि सार्वजनिक सड़कों और मंचों पर गैर-रिश्तेदार पुरुषों के बीच युवा महिलाओं को लाना और ऐसे कार्यक्रमों में गैर-इस्लामी रीति-रिवाजों तथा उत्सव के तौर-तरीकों को शामिल करना श्रद्धालुओं के लिए उचित नहीं है और इसकी अनुमति नहीं है।
उन्होंने महल्लू (स्थानीय मस्जिद-समुदाय) के पदाधिकारियों और मस्जिदों, मदरसों, अन्य संस्थानों तथा संगठनों के नेताओं से भी सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि ऐसे कार्यक्रम इस्लामी नियमों के अनुसार आयोजित किए जाएं।
नेताओं ने कहा कि महल्लू स्तर पर और अन्य जगहों पर आयोजित सभी कार्यक्रम धार्मिक मूल्यों और अनुशासन को बनाए रखते हुए आयोजित किए जाने चाहिए।
इस्लामी विद्वानों के संगठन ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के बीच नैतिक रूप से सही मिसाल पेश करने की जिम्मेदारी सभी की है।
इस बीच, इस निर्देश पर शुक्रवार को विभिन्न वर्गों के साथ-साथ सोशल मीडिया मंचों पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता पी. के. श्रीमति ने महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं लाने संबंधी निर्देश की कड़ी निंदा की और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि ‘‘महिलाओं को प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए’’ जैसी अभिव्यक्ति का इस्तेमाल ही ‘‘अपमानजनक और तिरस्कारपूर्ण’’ है तथा उन्होंने बयान को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की।
भाषा सिम्मी सुभाष
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