केरल: एफसीआरए संशोधन विवाद के बीच समाचार पत्र ने ‘‘राजनीतिक अवसरवादियों’’ पर निशाना साधा

केरल: एफसीआरए संशोधन विवाद के बीच समाचार पत्र ने ‘‘राजनीतिक अवसरवादियों’’ पर निशाना साधा

केरल: एफसीआरए संशोधन विवाद के बीच समाचार पत्र ने ‘‘राजनीतिक अवसरवादियों’’ पर निशाना साधा
Modified Date: April 11, 2026 / 03:01 pm IST
Published Date: April 11, 2026 3:01 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 11 अप्रैल (भाषा) केरल में चर्च समर्थित एक मलयालम दैनिक समाचार पत्र ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर जारी विवाद के बीच ‘‘राजनीतिक अवसरवादियों’’ की तीखी आलोचना करते हुए शनिवार को एक संपादकीय प्रकाशित किया।

‘दीपिका डेली’ के संपादकीय में कहा गया कि कथित धमकियों और अल्पसंख्यक समुदायों की आवाज दबाने की कोशिशों के बावजूद उसका रुख नहीं बदलेगा।

समाचार पत्र में यह संपादकीय ऐसे समय में प्रकाशित हुआ है जब एक दिन पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता पी.सी. जॉर्ज और उनके बेटे शोन जॉर्ज ने विधानसभा चुनाव में कुछ बिशप के कथित रुख को लेकर उनकी आलोचना की थी।

अखबार ने आम जनता के नाम पर बनाए गए लेकिन अल्पसंख्यकों को कथित तौर पर असमान रूप से प्रभावित करने वाले कानूनों का जिक्र किया और एफसीआरए पर चर्चा को रोकने के प्रयासों के खिलाफ सचेत किया।

संपादकीय में कहा गया, ‘‘भले ही राजनीतिक अवसरवादी एफसीआरए पर बात नहीं करने की धमकियां दें, हमारा रुख वही रहेगा।’’

शोन ने संपादकीय पर प्रतिक्रिया देते हुए अखबार की आलोचना की और कहा कि उसके विचारों को गिरजाघर का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘गिरजाघर एक ऐसी संस्था है, जिसमें मेरे जैसे व्यक्ति भी शामिल हैं। पत्रकारिता का मतलब किसी राजनीतिक दल या मोर्चे का पक्ष लेना नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और वह पहले ही गिरजाघर प्रमुखों को अपने विचार बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे।

शोन ने यह आरोप भी लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले अखबार ने कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के पक्ष में रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गिरजाघर का इस अखबार के निवेशकों के हितों की रक्षा करने का कोई नैतिक दायित्व नहीं है।

भाषा सिम्मी प्रशांत

प्रशांत


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