केरल: कड़े मुकाबले के बावजूद पद्मजा वेणुगोपाल को त्रिशूर से जीत का भरोसा
केरल: कड़े मुकाबले के बावजूद पद्मजा वेणुगोपाल को त्रिशूर से जीत का भरोसा
(हरी एम पिल्लई)
त्रिशूर (केरल), 21 मार्च (भाषा) केरल में प्रमुख राजनीतिक नेताओं के बेटे अपने पिता के प्रभाव के दौर में भी सांसद, विधायक और मंत्री बनकर राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान बना चुके हैं।
हालांकि, बेटियों के मामले में ऐसा काफी कम देखने को मिला है। इसमें एक नाम पद्मजा वेणुगोपाल का भी है जो अब तक एक भी चुनाव नहीं जीत पाई हैं। कांग्रेस के दिवंगत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण की बेटी पद्मजा ने चुनावी राजनीति में ऐसे समय प्रवेश किया जब ‘नेता’ के नाम से चर्चित करुणाकरण राज्य की राजनीति की दिशा तय कर रहे थे।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के पूर्व गढ़ मुकुंदपुरम से चुनाव लड़ने के बावजूद, वह हार गईं, जिसका मुख्य कारण उस समय पार्टी में व्याप्त बढ़ती गुटबाजी थी। माना जाता है कि 2016 और 2021 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ने पर भी इसी गुटबाजी ने उनकी संभावनाओं को प्रभावित किया था।
हालांकि, इस बार वह मध्य केरल विधानसभा क्षेत्र से किस्मत बदलने की उम्मीद कर रही हैं जहां वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता के रूप में मैदान में हैं।
उन्होंने पूर्ण उपेक्षा का आरोप लगाते हुए 2024 में कांग्रेस छोड़ दी थी। पद्मजा को राज्य की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले त्रिशूर में अपने परिवार की लंबी राजनीतिक विरासत के साथ-साथ इस क्षेत्र में भाजपा के लगातार बढ़ते वोट शेयर पर भरोसा है।
पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की, जिसमें उसने अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी को अपना उम्मीदवार बनाकर त्रिशूर सीट जीती।
हालांकि, पद्मजा को इस निर्वाचन क्षेत्र में वामपंथी उम्मीदवार अलंकोड लीलाकृष्णन और कांग्रेस उम्मीदवार राजन पल्लन से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है।
जाने माने कवि और लेखक लीलाकृष्णन इस सीट पर अपनी पार्टी की चुनावी सफलता को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं पल्लन त्रिशूर नगर निगम में हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
भाजपा के त्रिशूर मंडल अध्यक्ष और नगर निगम पार्षद रघुनाथ सी मेनन ने कहा कि पद्मजा इस बार ‘‘निश्चित रूप से जीतेंगी’’, क्योंकि 2021 में वह केवल करीब 900 वोट से हारी थीं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रदेश सचिव बिनॉय विश्वम ने कहा कि अलंकोड लीलकृष्णन को इस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है क्योंकि त्रिशूर केरल की सांस्कृतिक राजधानी है और एक कवि ही सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं।
विश्वम ने कहा, ‘विधानसभा में सांस्कृतिक हस्तियों का होना जरूरी है। हम चाहते हैं कि समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विविध प्रतिभाओं वाले लोग हों- महिलाएं, कार्यकर्ता, युवा और अन्य। लोग उन्हें (लीलकृष्णन को) चुनेंगे।’
कांग्रेस नीत एकीकृत लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) उम्मीदवार पल्लन ने भी हिंदू बहुल निर्वाचन क्षेत्र से जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणाम नौ अप्रैल को होने वाले चुनावों के नतीजों को प्रभावित नहीं करेंगे।
पल्लन ने कहा कि हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनाव, जिसमें कांग्रेस ने त्रिशूर नगर निगम जीता, इस निर्वाचन क्षेत्र में संभावित परिणाम का बेहतर संकेत थे।
पद्मजा ने जीत का भरोसा व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे त्रिशूर से जीतने का पूरा भरोसा है क्योंकि मुझे यहां की जनता पर विश्वास है।’’
भाषा आशीष माधव
माधव

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