केरल: उद्योग विभाग के प्रधान सचिव ने अवमानना मामले में उच्च न्यायालय से बिना शर्त मांगी माफी

केरल: उद्योग विभाग के प्रधान सचिव ने अवमानना मामले में उच्च न्यायालय से बिना शर्त मांगी माफी

केरल: उद्योग विभाग के प्रधान सचिव ने अवमानना मामले में उच्च न्यायालय से बिना शर्त मांगी माफी
Modified Date: June 22, 2026 / 02:50 pm IST
Published Date: June 22, 2026 2:50 pm IST

कोच्चि, 22 जून (भाषा) केरल उद्योग विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद हनीश भ्रष्टाचार से जुड़े अवमानना मामले में उच्च न्यायालय की कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बाद सोमवार को अदालत के समक्ष पेश हुए और बिना शर्त माफी मांगी।

भ्रष्टाचार का यह मामला ‘केरल स्टेट काजू डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (केएससीडीसी) से संबंधित है।

हनीश, न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की पीठ के समक्ष पेश हुए, जो कोल्लम निवासी कडकमपल्ली मनोज द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केएससीडीसी के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को मुकदमे की मंजूरी देने संबंधी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

हनीश ने केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, एक खंडपीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने हनीश को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का 19 जून को निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर अदालत गिरफ्तारी वारंट जारी करने समेत कड़े कदम उठा सकती है।

आदेश का पालन करते हुए हनीश पूर्वाह्न 10 बजकर 15 मिनट पर सरकारी वकील की मौजूदगी में अदालत में पेश हुए।

उन्होंने एक हलफनामा भी दाखिल किया, जिसमें पहले पेश न हो पाने की वजह बताई और अदालत से बिना शर्त माफी मांगी।

अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई के लिए दो जुलाई की तारीख तय की गई है।

भ्रष्टाचार का यह मामला 2015 का है, जब उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने केएससीडीसी में कथित अनियमितताओं को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

अपनी जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने केएससीडीसी के पूर्व अध्यक्ष आर चंद्रशेखरन समेत आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी।

इसके बाद, मनोज ने सीबीआई को मुकदमा चलाने की मंजूरी देने संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया था।

मंजूरी देने में लगातार देरी के कारण एकल पीठ ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की और प्रधान सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था।

भाषा खारी सुभाष

सुभाष


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