मानसून से पहले 1.41 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का एमसीडी का लक्ष्य

मानसून से पहले 1.41 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का एमसीडी का लक्ष्य

मानसून से पहले 1.41 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का एमसीडी का लक्ष्य
Modified Date: April 10, 2026 / 04:15 pm IST
Published Date: April 10, 2026 4:15 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने मानसून से पहले राष्ट्रीय राजधानी के नालों की सफाई के अपने वार्षिक अभियान के तहत 30 जून तक 1.41 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम ने इस वर्ष इस कार्य के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में चार फुट से अधिक चौड़े लगभग 545 किलोमीटर लंबे नालों को शामिल किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, अब तक गाद निकालने का लगभग 16 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि परियोजना के लिए अधिकतर निविदाएं पहले ही आवंटित की जा चुकी हैं।

एमसीडी की पर्यावरण प्रबंधन सेवा समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर ने कहा कि दिल्ली में हटाई जा रही गाद की मात्रा पर रोजाना नजर रखी जा रही है और निगम इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

कपूरी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि हम समय पर गाद हटाने के अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे, क्योंकि काम आवंटित किया जा चुका है और निगरानी की जा रही है जबकि अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।’’

उन्होंने कहा कि सड़क के किनारे जमा मलबा भी समय पर हटाया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि लगभग 13,000 नालें हैं जिनकी गहराई चार फुट से कम है और जिनकी कुल लंबाई लगभग 6,000 किलोमीटर है। इन नालों की साल भर सफाई की जाती है।

उन्होंने बताया कि तीन महीने तक जारी रहने वाला गाद हटाने का यह अभियान एमसीडी के 12 जोन के अंतर्गत 40 संभागों में चलाया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में निगम का वार्षिक लक्ष्य लगभग 2.33 लाख मीट्रिक टन गाद निकालना है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान अभियान के तहत सफाई के लिए कुल 793 मुख्य नालों (चार फीट से अधिक चौड़े) की पहचान की गई है। छोटे नालों की सफाई स्वच्छता विभाग द्वारा अलग से की जा रही है।

उन्होंने बताया कि नालों से निकाली गई गाद को एक सप्ताह के भीतर उठाकर भलस्वा, सिंघोला, ओखला और गाजीपुर सहित निर्दिष्ट डंपिंग स्थलों पर ले जाना होगा।

भाषा यासिर अविनाश वैभव

वैभव


लेखक के बारे में