गृह मंत्रालय पूर्व अग्निवीरों को सीएपीएफ में शामिल करने के लिए नीति लाएगा: सीआईएसएफ महानिदेशक
गृह मंत्रालय पूर्व अग्निवीरों को सीएपीएफ में शामिल करने के लिए नीति लाएगा: सीआईएसएफ महानिदेशक
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्रालय पूर्व अग्निवीरों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में समाहित करने के लिए एक व्यापक नीति लाएगा। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने सोमवार को यह जानकारी दी।
रंजन ने संवाददाताओं से कहा कि सीआईएसएफ ने भी इस संदर्भ में एक कार्ययोजना तैयार करने और उसे मंत्रालय के समक्ष पेश करने के लिए अपने मुख्यालय में एक समिति का गठन किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह गृह मंत्रालय का नीतिगत मामला है। इस पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से परामर्श किया जाएगा। गृह मंत्रालय एक उचित नीति तैयार करेगा, जिसका हम सभी पालन करेंगे।’’
रंजन ने कहा कि बल के स्तर पर गठित समिति पूर्व अग्निवीरों को समाहित करने के तरीकों की पता लगा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व अग्निवीरों को किस अनुपात में और कहां शामिल किया जाएगा, इसकी विस्तृत योजना गृह मंत्रालय तैयार करेगा।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि नौसेना से आने वाले अग्निवीर बंदरगाहों की सुरक्षा से संबंधित सीआईएसएफ के कर्तव्यों के लिए ‘‘प्रासंगिक’’ हो सकते हैं।
जून 2022 में केंद्र सरकार ने तीनों सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले सैनिकों की औसत आयु में कमी लाने के उद्देश्य से अग्निपथ भर्ती योजना शुरू की थी।
इस योजना के तहत साढ़े सत्रह साल से 21 साल की आयु वर्ग के चयनित उम्मीदवारों को चार साल के लिए सेना, वायुसेना और नौसेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है, जिसमें से 25 प्रतिशत को 15 और वर्षों के लिए बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवा से हटा दिया जाता है।
सरकार ने पहले ही 11 लाख सदस्यों वाले सीएपीएफ में कांस्टेबल पद पर भविष्य में होने वाली सभी नियुक्तियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत पद आरक्षित कर दिए हैं। सीएपीएफ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सीआईएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) शामिल हैं।
रंजन ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही भारत की लगभग 6,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर बसे स्थानीय समुदायों से जुड़ने के लिए ‘‘तटीय जीवंत गांव’’ कार्यक्रम शुरू करेगी।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र द्वारा उत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले गांवों के लोगों के लिए शुरू किए गए जीवंत गांव कार्यक्रम (वीवीपी) की तर्ज पर होगा।
भाषा पारुल नेत्रपाल
नेत्रपाल


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