मिशन ज्ञान भारतम : जम्मू-कश्मीर में 33,858 दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की गई

मिशन ज्ञान भारतम : जम्मू-कश्मीर में 33,858 दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की गई

मिशन ज्ञान भारतम : जम्मू-कश्मीर में 33,858 दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की गई
Modified Date: February 5, 2026 / 10:39 am IST
Published Date: February 5, 2026 10:39 am IST

जम्मू, पांच फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र सरकार की ‘ज्ञान भारतम’ पहल के तहत विभिन्न संस्थानों और निजी संरक्षकों के पास मौजूद 33,858 दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

इस पहल का उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को खोजकर उसकी सुरक्षा करना और संरक्षण सुनिश्चित करना है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि वह जनता को सक्रिय रूप से शामिल करे और दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए उन्हें आगे आने के लिए प्रोत्साहित करे।

अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक के. के. सिद्धा ने बताया कि सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों, धार्मिक प्रतिष्ठानों तथा निजी संरक्षकों के पास मौजूद 33,858 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों का पता लगाने और उनके स्वामियों की सहमति से उनका डिजिटलीकरण करने के लिए ‘हर घर दस्तक’ नामक एक विशेष घरेलू सर्वेक्षण की योजना बनाई जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस पहल के तहत प्रतिदिन कम से कम एक पंचायत को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।’’

कश्मीर विश्वविद्यालय के फारसी विभाग के प्रमुख जहांगीर अहमद ने बताया कि उनके विभाग को डिजिटलीकरण के लिए क्लस्टर केंद्र नामित किया गया है और विश्वविद्यालय में स्थापित प्रयोगशाला में अब तक लगभग 5,000 पांडुलिपि पृष्ठों को स्कैन किया जा चुका है।

संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव बृज मोहन शर्मा ने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य देश भर में एक करोड़ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना है ताकि भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार स्थापित किया जा सके, जिससे ज्ञान का निर्बाध आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके और भारत की बौद्धिक विरासत का दीर्घकालिक संरक्षण हो सके।

भाषा खारी शोभना

शोभना


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