मुकेश, किशोर, रफी, लता, आशा…हमें छोड़कर चले गए, लेकिन उनके गीत आज भी गूंजते हैं

मुकेश, किशोर, रफी, लता, आशा...हमें छोड़कर चले गए, लेकिन उनके गीत आज भी गूंजते हैं

मुकेश, किशोर, रफी, लता, आशा…हमें छोड़कर चले गए, लेकिन उनके गीत आज भी गूंजते हैं
Modified Date: April 25, 2026 / 06:53 pm IST
Published Date: April 25, 2026 6:53 pm IST

(कोमल पंचमटिया)

नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) मुकेश, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर बादलों में आशा भोसले का स्वर्ग में स्वागत कर रहे हैं। एआई द्वारा बनाये गए इस मीम ने संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों को इस बात का एहसास दिलाया कि ये पांच महान व्यक्ति अब हमेशा के लिए स्मृति में अमर हो गए हैं।

बानबे वर्ष की आयु में भोसले के निधन दो सप्ताह पहले ही हुआ था। संगीत की जिस दुनिया को वह छोड़कर गई हैं, दशकों से चलती आ रही है और आने वाले दशकों तक चलती रहेगी।

भोसले के निधन के साथ, महान गायकों में से अंतिम चला गया है। भारतीय लोकप्रिय संगीत के इतिहास में एक पन्ना पलट गया है।

‘अभी ना जाओ छोड़ कर’, ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’, ‘जीना यहां मरना यहां’, ‘आवारा हूं’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘लग जा गले’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘चुरा लिया’, ‘दिल चीज’ और ‘मेरा कुछ सामान’…

इन पांच महान गायकों के हजारों गाने विरासत की तरह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचते रहेंगे, लेकिन उनमें कोई नया गाना नहीं जोड़ा जाएगा।

गीतकार समीर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘आशा जी के निधन के साथ ही एक युग का अंत हो गया है। इन कलाकारों ने गायन को कभी अपना पेशा नहीं माना। यह उनका जुनून था और उन्होंने इसे अपना सब कुछ दे दिया… उनके बाद की पीढ़ी उस तरह का बेहतरीन संगीत नहीं बना पाई है क्योंकि सिनेमा में बदलाव आया है और ओटीटी का आगमन हो गया है।’’

भोसले ने अपने 90वें जन्मदिन पर ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा था, “जब लोग हमारे गानों को पसंद करते हैं, चाहे भारत के बाहर हों या देश के अंदर, तो बहुत अच्छा लगता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ पुराने गाने बहुत ही खूबसूरती से लिखे, संगीतबद्ध और गाए गए थे। मोहम्मद रफी साहब हों, किशोर हों, मुकेश जी हों या कोई और, सभी गायक बहुत अच्छा गाते थे। ‘अभी, सब खाली हो गया है।’’

गायिका ने बताया था कि उन्होंने एक बार लता मंगेशकर के साथ ‘द लास्ट मुगल’ शीर्षक से एक संगीत कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में सोचा था।

उन्होंने कहा था, “मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दीदी (मंगेशकर) ने कहा था कि हम दोनों बहनें एक शो करेंगी और उसका नाम ‘आखिरी मुगल’ होगा। यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी; इसलिए ये शब्द मेरे मुंह से निकल गए। मेरा मतलब ये कहना नहीं था कि ‘मैं महारानी हूं या महान हूं’, मेरा मतलब ये था कि मैं कई सालों से इस इंडस्ट्री को करीब से जानती हूं।”

लता मंगेशकर का निधन फरवरी 2022 में हुआ।

कई गायक, गीतकार, सिनेमा और संगीत समीक्षक मानते हैं कि इन पांच महान हस्तियों जैसा करियर बनाना नामुमकिन है।

संगीत समीक्षक राजीव विजयकर के अनुसार, इन पांचों महान गायकों की आवाज़ें किसी भी अभिनेता की आवाज़ से मेल खा सकती थीं। उन्होंने कहा, ‘‘वे अपनी ही श्रेणी में थे… आज के युवा रियलिटी शो में रफी, मुकेश, किशोर, उदित (नारायण) और (कुमार) सानू के गाने गा रहे हैं। वे सोनू निगम और श्रेया से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। वह चमक पूरी तरह से गायब है।”

भोसले का करियर महज 10 साल की उम्र में शुरू हुआ और लगभग आठ दशकों तक चला। यह इस बात का प्रमाण है कि एक महान कलाकार प्रतिभा और अनुशासन के बल पर सफलता की ऊंचाइयों और गहराइयों दोनों को पार कर सकता है।

उन्होंने 1947 से लेकर 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में 11,000 से अधिक गाने गाकर संगीत इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने मधुबाला, साधना और तनुजा से लेकर उर्मिला मातोंडकर और तनुजा की बेटी काजोल तक के लिए गाया।

गायक कुमार सानू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वह एक सशक्त गायिका थीं, जिन्हें शास्त्रीय और पश्चिमी संगीत दोनों का अद्भुत ज्ञान था। मैं 40 वर्षों से इस उद्योग में हूं, जैसा कि अलका (याग्निक) जी और कविता (कृष्णमूर्ति) जी भी हैं, लेकिन आज के गायकों का करियर आशा और लता जी जितना लंबा या शायद उनका आधा भी नहीं हो सकता है।’’

गायक ने 1990 के दशक में आशा जी के साथ ‘तुम्हारी नजरों में हमने देखा’, ‘चेहरा क्या देखते हो’, ‘मुझको तो कुछ कुछ होता है’ जैसे कई हिट गाने गाये। उन्होंने कहा कि उन्हें उनके साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा, ‘आशा जी ने अंत तक काम किया, विभिन्न पीढ़ियों के संगीतकारों और गायकों के साथ मिलकर काम किया। हम अभी भी यहां हैं और अपनी आवाज देने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारे पर्याप्त रोमांचक अवसर नहीं हैं, जो हमारे द्वारा बनाई गई विरासत के साथ न्याय करे।’’

भाषा अमित माधव

माधव


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