दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक पदोन्नति में बाधाओं पर एनडीटीएफ ने जताई चिंता

दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक पदोन्नति में बाधाओं पर एनडीटीएफ ने जताई चिंता

दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक पदोन्नति में बाधाओं पर एनडीटीएफ ने जताई चिंता
Modified Date: June 22, 2026 / 04:58 pm IST
Published Date: June 22, 2026 4:58 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) शिक्षक संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के वैधानिक निकायों से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2018 के नियमों को ‘‘शब्दशः और भावना के अनुरूप’’ लागू करने की मांग की है।

संगठन का आरोप है कि पदोन्नति संबंधी नियमों की संकीर्ण व्याख्या शिक्षकों के कैरियर विकास और शैक्षणिक स्थिरता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही है।

विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद और अकादमिक परिषद के अध्यक्ष एवं सदस्यों को संबोधित एक खुले पत्र में एनडीटीएफ के अध्यक्ष ए. के. भागी ने विश्वविद्यालय के विभागों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति तथा पदोन्नति प्रक्रिया में बढ़ती बाधाओं पर चिंता व्यक्त की।

शिक्षक संगठन ने आरोप लगाया कि पदोन्नति के मूल्यांकन के दौरान विश्वविद्यालयों, संस्थानों और सरकारी निकायों की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित शोधपत्रों को अस्वीकार किया जा रहा है जबकि निजी वाणिज्यिक अनुक्रमण (इंडेक्सिंग) प्रणालियों और पत्रिकाओं को अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है।

एनडीटीएफ के अनुसार ऐसी प्रक्रियाओं के कारण पदोन्नति में देरी हो रही है और विश्वविद्यालय विभागों में ‘एनएफएस’ (नॉट फाउंड सूटेबल) के मामले बढ़ रहे हैं।

भागी ने पत्र में कहा, ‘‘यूजीसी नियम-2018 ने पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक सरल, त्वरित और सुलभ बनाकर शिक्षण पेशे की गरिमा को पुनर्स्थापित किया था। इसकी मूल भावना को कमजोर करने का कोई भी प्रयास शिक्षकों के अधिकारों और शैक्षणिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाता है।’’

पिछले छह दशकों के शिक्षक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए एनडीटीएफ ने कहा कि विभिन्न शिक्षक संगठनों के निरंतर संघर्षों के परिणामस्वरूप पदोन्नति नीतियों में सुधार हुए, जिनमें कैरियर उन्नयन तंत्र की शुरुआत और प्रोफेसर बनने के लिए आसान मार्ग शामिल हैं।

संगठन ने दावा किया कि यूजीसी नियम-2018 के लागू होने से दिल्ली विश्वविद्यालय में हजारों पदोन्नतियां संभव हुईं तथा कॉलेजों में प्रोफेसर पद और विश्वविद्यालय विभागों में वरिष्ठ प्रोफेसर पदों की व्यवस्था शुरू हुई।

एनडीटीएफ ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारी पदोन्नति के मामलों में अत्यधिक प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। संगठन के अनुसार, सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि वह शैक्षणिक अनियमितताओं या फर्जी शोध का समर्थन नहीं करता, लेकिन शिक्षकों के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण वास्तविक शोध कार्यों को अयोग्य नहीं ठहराया जाना चाहिए।

शिक्षक संगठन ने दावा किया कि नियुक्तियों और पदोन्नतियों में प्रक्रियागत बाधाएं तथा देरी सामाजिक न्याय, शैक्षणिक उत्कृष्टता और शिक्षण पेशे की गरिमा को प्रभावित कर सकती हैं।

एनडीटीएफ ने विश्वविद्यालय के वैधानिक निकायों से आग्रह किया कि पदोन्नति और नियुक्ति प्रक्रियाओं को पारदर्शी, न्यायसंगत, सहयोगात्मक तथा शिक्षक-हितैषी बनाए रखा जाए।

पत्र में कहा गया है, ‘‘शिक्षकों की गरिमा, सामाजिक न्याय के माध्यम से संस्थान की विश्वसनीयता और शैक्षणिक वातावरण की स्थिरता काफी हद तक ऐसी पदोन्नति एवं नियुक्ति व्यवस्था पर निर्भर करती है जो पारदर्शी, निष्पक्ष और शिक्षक-हितैषी हो।’’

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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