खाड़ी देशों में सीबीएसई के स्वतंत्र छात्रों के मूल्यांकन के लिए नयी नीति तैयार: केंद्र

खाड़ी देशों में सीबीएसई के स्वतंत्र छात्रों के मूल्यांकन के लिए नयी नीति तैयार: केंद्र

खाड़ी देशों में सीबीएसई के स्वतंत्र छात्रों के मूल्यांकन के लिए नयी नीति तैयार: केंद्र
Modified Date: June 22, 2026 / 06:29 pm IST
Published Date: June 22, 2026 6:29 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्वतंत्र (प्राइवेट) छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक नयी नीति बनाई है। ये छात्र उन खाड़ी देशों में थे, जहां हाल ही में ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं।

केंद्र सरकार और सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ को बताया कि खाड़ी देशों में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण परीक्षाएं रद्द होने से प्रभावित इसी तरह के हालात वाले छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक नयी अखिल भारतीय नीति तैयार की गई है।

मेहता ने कहा कि 21 जून को जारी नयी नीति के तहत, बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्वतंत्र छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक अलग तरीका अख्तियार किया गया है।

उन्होंने बताया कि जिन विषयों की परीक्षा नहीं हो सकी, उनके लिए स्वतंत्र छात्र के 10वीं और 12वीं कक्षा की पिछली बोर्ड परीक्षाओं में मिले अंक के आधार पर प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नयी नीति के तहत, जिन विषयों की परीक्षा रद्द कर दी गई थी, उनके अंकों की गणना 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में ‘थ्योरी’ में मिले अंक के 40 प्रतिशत और 12वीं कक्षा की पिछली बोर्ड परीक्षा में ‘थ्योरी’ में मिले अंक के 60 प्रतिशत के आधार पर की जाएगी।

मेहता ने बताया कि सात खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से मुख्य रूप से दो तरह के छात्र प्रभावित हुए हैं- स्कूल के नियमित छात्र और स्वतंत्र छात्र।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र उम्मीदवार के मामले में एक खास चुनौती यह थी कि उनके पास कोई स्कूल नहीं था जो आंतरिक मूल्यांकन के रिकॉर्ड (जैसे तिमाही, छमाही और प्री-बोर्ड परीक्षा के अंक) दे सके; इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर 27 मार्च की मूल मूल्यांकन योजना तैयार की गई थी।

शीर्ष अदालत सऊदी अरब के अल जुबैल के स्वतंत्र उम्मीदवार प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने सीबीएसई के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 12वीं कक्षा की सुधार परीक्षा (इम्प्रूवमेंट एग्जाम) के नतीजे मूल मूल्यांकन योजना के हिसाब से घोषित नहीं किए गए थे।

पटेल की दलील थी कि यह फैसला मनमाना और भेदभावपूर्ण था, जिससे उसकी उच्च शिक्षा की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ा।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसके मामले में, भौतिकी और रसायन शास्त्र की परीक्षाएं तो हुईं, लेकिन गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।

उसने दावा किया था कि जिन दो पेपर (भौतिकी और रसायन) में वह शामिल हुआ था, उसमें मूल्यांकन असल अंकों के आधार पर किया गया, जबकि रद्द किए गए तीन विषयों में मूल्यांकन नयी नीति के तहत किया गया, जिसे 21 जून को अधिसूचित किया गया था।

मेहता ने पीठ को बताया कि नयी नीति के तहत, पटेल को मिले अंक उसके पिछले प्रदर्शन की तुलना में बेहतर थे, और उसे ईमेल के ज़रिये नतीजे की जानकारी दी गई थी और इसे उसके डिजीलॉकर में अद्यतन किया जाएगा।

पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या सीबीएसई की नयी नीति से उसकी शिकायतें दूर हो गई हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विनीत जिंदल ने माना कि परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है, लेकिन उन्होंने शीर्ष अदालत से अपील की कि उनके मुवक्किल को उत्तर कुंजी की प्रति हासिल करने और बोर्ड के नियमों के अनुसार पुनर्मूल्यांकन करवाने का अधिकार मिलना चाहिए।

पीठ ने रिट याचिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है। पीठ ने साफ़ किया कि वह ऐसी कोई राहत नहीं दे सकती, जिसकी मांग ही न की गई हो।

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल की बात रिकॉर्ड की और मामले का निपटारा कर दिया, साथ ही याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि अगर उसे कोई शिकायत हो तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।

सीबीएसई ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सात पश्चिम एशियाई देशों (बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई) में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश


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