भय के आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता:इलाहाबाद उच्च न्यायालय
भय के आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता:इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज, नौ अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि पासपोर्ट का नवीनीकरण एक व्यक्ति का वैध अधिकार है जिसे चिंता या भय के आधार पर नहीं रोका जा सकता।
इसी साथ उच्च न्यायालय ने संबंधित क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को याचिकाकर्ता के पासपोर्ट का अविलंब नवीनीकरण का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने रामपुर के दिलीप की एक याचिका पर यह निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने रामपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 30 जुलाई, 2025 को पारित आदेश रद्द कर दिया जिसमें पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुमति देने से मना कर दिया गया था।
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, याचिकाकर्ता सऊदी अरब गया है और वर्तमान में वह उसी देश में रह रहा है और एक आपराधिक मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामपुर के समक्ष पेश होने के लिए भारत लौटना चाहता है। इस मामले में उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।
हालांकि, जब उसने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामपुर के समक्ष अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुमति मांगते हुए आवेदन किया तो आवेदन खारिज कर दिया गया। इसलिए उसने उच्च न्यायालय में धारा 528 (उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियां) के तहत यह याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने आशंका व्यक्त की कि यदि याचिकाकर्ता को पासपोर्ट उपलब्ध कराया जाता है तो मौजूदा याचिका में ऐसा कोई आश्वासन या शपथ पत्र नहीं दिया गया है कि याचिकाकर्ता भारत लौटेगा और गैर जमानती वारंट के आलोक में संबंधित अदालत के समक्ष पेश होगा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि पासपोर्ट का नवीनीकरण याचिकाकर्ता का वैध अधिकार है जिसे राज्य सरकार के वकील द्वारा व्यक्त आशंका या भय के आधार पर नहीं रोका जा सकता।
वैसे उच्च न्यायालय ने विदेश मंत्रालय को इस आदेश की प्रति सऊदी अरब के दूतावास को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जिससे गैर जमानती वारंट की तामील कराई जा सके।
इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दिलीप के पक्ष में निर्णय देते हुए उसके पासपोर्ट का नवीनीकरण करने का संबंधित क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया।
भाषा सं राजेंद्र
राजकुमार
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