पेटा इंडिया ने गलगोटिया विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर ‘रोबोट डॉग’ को सर्कस को दान करने का अनुरोध किया
पेटा इंडिया ने गलगोटिया विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर ‘रोबोट डॉग’ को सर्कस को दान करने का अनुरोध किया
नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) पेटा इंडिया ने गलगोटिया विश्वविद्यालय से अपना ‘रोबोट डॉग’ ‘ओरायन’ को दान करने का आग्रह किया है ताकि इनका उपयोग करके सर्कस के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले असली कुत्तों को मुक्त कराया जा सके। पेटा इंडिया ने कहा कि इससे कुत्तों के पुनर्वास में मदद मिल सकेगी।
हाल ही में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में ‘रोबोट डॉग’ को प्रस्तुत किया गया था, जहां विश्वविद्यालय ने चीन के रोबोट को अपना आविष्कार बताकर विवाद खड़ा कर दिया था।
विश्वविद्यालय को कार्यक्रम स्थल खाली करने और अपना स्टॉल हटाने के लिए कहा गया था।
पशु अधिकार संगठन की नीति उपाध्यक्ष खुशबू गुप्ता ने 26 फरवरी को लिखे पत्र में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुनील गलगोटिया को लिखा, “पेटा इंडिया, गलगोटिया विश्वविद्यालय से अनुरोध करती है कि वह ओरायन को पेटा इंडिया के माध्यम से किसी सर्कस को दान करने पर विचार करे ताकि इसका उपयोग सर्कसों में इस्तेमाल होने वाले असली कुत्तों की जगह किया जा सके, जिन्हें हम उन्हें प्यार करने वाले परिवारों या किसी अभयारण्य में भेज सकें।”
उन्होंने पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय इस दान के माध्यम से यह दिखाने में मदद कर सकता है कि तकनीक का उपयोग जानवरों के कष्टों को कम करने के लिए कैसे किया जा सकता है।
नीति ने कहा, “ओरायन का दान यह दर्शाता है कि गलगोटिया विश्वविद्यालय पशु कल्याण और अच्छे कार्यों के लिए तकनीक के उपयोग के प्रति प्रतिबद्ध है। आपके छात्र सर्कस कलाकारों को तकनीक का उपयोग करने का प्रशिक्षण देकर और उन्हें मानवीय, तकनीक-आधारित विकल्पों की ओर सुचारु रूप से आगे बढ़ने में सहायता करके प्रत्यक्ष भूमिका निभा सकते हैं।”
पेटा इंडिया ने एक बयान में आरोप लगाया कि कुत्ते, घोड़े, ऊंट, बकरी और पक्षियों सहित कई प्रजातियों को अब भी सर्कसों में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जाता है तथा उन्हें लगातार यात्रा, कैद व हिंसा जैसी तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
पेटा इंडिया ने कहा, “जैसे-जैसे हमारा देश वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज बनने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जानवरों के जीवन को बेहतर बनाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के अवसर बढ़ रहे हैं।”
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष

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