प्रधानमंत्री ने ‘हूल दिवस’ पर संथाल विद्रोह के वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री ने ‘हूल दिवस’ पर संथाल विद्रोह के वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री ने ‘हूल दिवस’ पर संथाल विद्रोह के वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी
Modified Date: June 30, 2026 / 04:49 pm IST
Published Date: June 30, 2026 4:49 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ‘हूल दिवस’ के अवसर पर संथाल विद्रोह के वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी और कहा कि यह दिन देश के आदिवासी समाज की उस अद्भुत भावना का प्रतीक है, जो मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार रहती है।

‘हूल दिवस’ हर वर्ष 30 जून को 1855 के ‘संथाल हूल’ अथवा संथाल विद्रोह की स्मृति में मनाया जाता है। यह विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अन्याय और दमन के खिलाफ आदिवासी समुदाय ने किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ हूल दिवस हमारे आदिवासी समाज की उस अदम्य भावना का सशक्त प्रतीक है, जो मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने को सदैव तत्पर रहती है। भारतीय इतिहास के इस गौरवपूर्ण अवसर पर मैं विदेशी शासन के अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े रहने वाले सभी वीर योद्धाओं सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।’’

उन्होंने कहा कि आदिवासी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए इन वीरों का संघर्ष और बलिदान देशवासियों के हृदय में हमेशा नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता रहेगा।

छोटानागपुर क्षेत्र में 1855 का संथाल विद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (सिपाही विद्रोह) से पहले ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुए सबसे महत्वपूर्ण जनविद्रोहों में से एक माना जाता है।

हालांकि, इस विद्रोह को अंततः ब्रिटिश सेना ने बलपूर्वक दबा दिया, जिसमें हजारों संथाल आदिवासियों की जान चली गई।

भाषा शोभना माधव

माधव


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