त्रिपुरा में कोकबोरोक दिवस पर रैली के दौरान हंगामा करने के आरोप में पुलिस ने 40 छात्रों को हिरासत में लिया
त्रिपुरा में कोकबोरोक दिवस पर रैली के दौरान हंगामा करने के आरोप में पुलिस ने 40 छात्रों को हिरासत में लिया
अगरतला, 19 जनवरी (भाषा) अगरतला में सोमवार को कोकबोरोक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित रैली के दौरान हंगामा करने के आरोप में कम से कम 40 आदिवासी छात्रों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
कोकबोरोक एवं अन्य अल्पसंख्यक भाषा विभाग, कोकबोरोक को राज्य भाषा के रूप में मान्यता मिलने के उपलक्ष्य में 19 जनवरी को कोकबोरोक दिवस का आयोजन करता है।
अधिकारियों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राम पदा जमातिया और पूर्व विधायक अतुल देबबर्मा के नेतृत्व में निकाली जा रही आधिकारिक रैली से पहले आदिवासी छात्रों का एक समूह अचानक रोमन लिपि में लिखीं तख्तियां लेकर आगे चलने लगा, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
शहर के पोस्ट ऑफिस चौमुहानी पर पुलिस ने इस समूह को रोक लिया और हिरासत में ले लिया।
थाना प्रभारी राणा चटर्जी ने संवाददाताओं से कहा, “कोकबोरोक दिवस रैली के दौरान उपद्रव करने के आरोप में हमने लगभग 40 छात्रों को हिरासत में लिया है और उन्हें एडी नगर पुलिस लाइन ले जाया गया है। उन्हें बाद में रिहा कर दिया जाएगा।”
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक राम पदा जमातिया ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि युवाओं के एक समूह ने 48वें कोकबोरोक दिवस के अवसर पर आयोजित रैली को बाधित करने का प्रयास किया। पुलिस मौके पर पहुंची और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले सभी युवाओं को हिरासत में ले लिया।”
इस बीच, टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने बंगाली लिपि में लिखी तख्तियां लेकर विरोध कर रहे युवाओं की हिरासत पर अफसोस व्यक्त किया।
उन्होंने वीडियो संदेश में कहा, “कोकबोरोक दिवस कार्यक्रम के दौरान बांग्ला लिपि में लिखी तख्तियां देखना अच्छा नहीं लगता, जबकि हम किसी दूसरी लिपि की मांग कर रहे हैं। यह हमारे लिए शर्म की बात है। इस कदम के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।”
देबबर्मा ने कहा, “हम चाहते हैं कि राज्य में हर भाषा फले-फूले, लेकिन भाषा के लिए जबरन किसी लिपि को थोपने से हालात बेकाबू हो सकते हैं। हमारे अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।”
कोकबोरोक पूर्वोत्तर राज्य की 19 जनजातियों में से अधिकांश की मातृभाषा है, लेकिन इसकी अपनी कोई स्वतंत्र लिपि नहीं है।
भाषा खारी प्रशांत
प्रशांत


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