पीपीसीबी खामियों को दूर करने के लिए उचित समय देने के बाद ही दंडात्मक कदम उठाए: उच्च न्यायालय

पीपीसीबी खामियों को दूर करने के लिए उचित समय देने के बाद ही दंडात्मक कदम उठाए: उच्च न्यायालय

पीपीसीबी खामियों को दूर करने के लिए उचित समय देने के बाद ही दंडात्मक कदम उठाए: उच्च न्यायालय
Modified Date: May 8, 2026 / 06:49 pm IST
Published Date: May 8, 2026 6:49 pm IST

चंडीगढ़, आठ मई (भाषा) पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रदूषण मामले में सांसद राजेंद्र गुप्ता की कंपनी ‘ट्राइडेंट लिमिटेड’ को राहत देते हुए पीपीसीबी को शुक्रवार को निर्देश जारी किया कि कंपनी को “छोटी-मोटी खामियों को दूर करने” के लिए 30 दिन की उचित मोहलत देने के बाद ही दंडात्मक कदम उठाए जाएं।

मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ ने कहा कि ‘ट्राइडेंट लिमिटेड’ की यह आशंका “काफी हद तक सही प्रतीत होती है” कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से 30 अप्रैल को कंपनी की एक इकाई पर की गई छापेमारी राजनीतिक प्रतिशोध का नजीता थी।

राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता कंपनी के मानद चेयरमैन हैं। गुप्ता उन सात सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने हाल में आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था।

पीठ ने कहा कि पीपीसीबी ऐसी कोई आपातकालीन स्थिति दिखाने में नाकाम रहा है, जहां कोई नदी, कुआं, भूमि या पर्यावरण जहरीले अपशिष्टों से प्रदूषित हो रहा हो।

‘ट्राइडेंट लिमिटेड’ के अधिकारियों ने कंपनी से जुड़े एक परिसर में पीपीसीबी की छापेमारी के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था।

उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता कंपनी को पीपीसीबी की ओर से कोई भी दंडात्मक कदम उठाए जाने की सूरत में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का रुख करने की छूट भी दे दी।

‘ट्राइडेंट लिमिटेड’ ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 30 अप्रैल को कंपनी की विनिर्माण इकाई पर “अप्रत्याशित छापेमारी” करने की प्रतिवादियों की मनमानी, उत्पीड़क और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई से दुखी है।

उसने दावा किया था कि यह कार्रवाई “बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना किसी उल्लंघन की जानकारी दिए और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की पूर्ण अवहेलना करते हुए” की गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कंपनी की वकील मुनीशा गांधी, विराज गांधी और आदर्श दुबे ने दलील दी कि 30 अप्रैल को की गई छापेमारी वास्तविक पर्यावरणीय चिंताओं के बजाय “राजनीतिक प्रतिशोध की भावना” से प्रेरित थी, जिससे इस्तेमाल की गई शक्तियां अमान्य हो गईं।

पीपीसीबी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस पटवालिया ने पंजाब जल नियमों के नियम 32(6) का हवाला देते हुए कहा कि जहां पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका स्पष्ट है, वहां सुनवाई का पूर्व अवसर दिए जाने की आवश्यकता को हटाया जा सकता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।

उसने कहा, “हालांकि, एक मुद्दा जिस पर विचार किया जाना चाहिए, वह प्रतिवादी संख्या-2 (पीपीसीबी) के अधिकारियों की एक टीम की ओर से 30 अप्रैल को की गई छापेमारी का समय है। यह छापेमारी 24 अप्रैल को राजेंद्र गुप्ता के राज्यसभा के छह अन्य सदस्यों के साथ ‘आप’ छोड़ भाजपा में शामिल होने के ठीक बाद की गई।”

अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता कंपनी के मन में यह आशंका है कि प्रतिवादी संख्या-2 की ओर से 30 अप्रैल को की गई छापेमारी राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित थी और यह आशंका काफी हद तक सही प्रतीत होती है।”

उसने कहा, “ऐसे में इस अदालत का सुविचारित मत है कि चूंकि, प्रतिवादी संख्या-2 ऐसी किसी भी आपातकालीन स्थिति को दर्शाने में नाकाम रहा है, जहां कोई नाला, कुआं, भूमि या पर्यावरण जहरीले अपशिष्टों से प्रदूषित हो रहा हो, इसलिए याचिकाकर्ता कंपनी को छोटी-मोटी खामियों को दूर करने के लिए 30 दिन का उचित अवसर प्रदान करने के बाद ही प्रतिवादी संख्या-2 को दंडात्मक कदम उठाने की अनुमति देना उचित होगा।”

भाषा पारुल माधव

माधव


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