राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने ओडिया नव वर्ष पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने ओडिया नव वर्ष पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने ओडिया नव वर्ष पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं
Modified Date: April 14, 2026 / 03:08 pm IST
Published Date: April 14, 2026 3:08 pm IST

भुवनेश्वर, 14 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मंगलवार को ओडिशा के लोगों को ‘महा बिशुबा संक्रांति’ व ओडिया नव वर्ष के अवसर पर शुभकामनाएं दीं।

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह, नितिन गडकरी और धर्मेंद्र प्रधान तथा राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी लोगों को शुभकामनाएं दीं।

मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘बैसाखी, विशु, विशुव, बोहाग बिहू, पोइला बैसाख, मेषादी, वैशाखादि और पुत्तान्डु के शुभ अवसर पर, मैं भारत और विदेश में रह रहे सभी देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।’

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘महा बिशुबा पणा संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं। ओडिशा के हमारे सभी बहनों और भाइयों को महा बिशुबा संक्रांति के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई। प्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद से सभी को सुख और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति हो।’

केंद्रीय मंत्री शाह ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएं दीं और सभी के कुशल मंगल की कामना की।

राज्यपाल ने कहा कि यह त्योहार राज्य की संस्कृति की भव्यता, परंपराओं की मधुरता और ओडिया पहचान के गौरव को दर्शाता है।

माझी ने कहा, ‘यह नया साल आपके जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर दे और हमें वैश्विक मंच पर अपनी संस्कृति तथा ओडिया पहचान को और अधिक गौरवान्वित करने की नयी शक्ति प्रदान करे।’

नवीन पटनायक ने उम्मीद जतायी कि नया साल सभी लोगों के लिए नयी आशाएं और संभावनाएं लेकर आएगा।

इस अवसर पर पुरी के जगन्नाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए गए और नवनिर्मित पंचांग को देवताओं के समक्ष पढ़ा गया।

इस दिन लोग उपवास रखते हैं और विभिन्न मंदिरों में देवी-देवताओं को नये वस्त्र और ‘पना’ (मीठा जल) अर्पित करते हैं। ‘पना’ पानी, गुड़, दही और मसालों से तैयार किया जाता है।

इसी के साथ ओडिशा के लोग ‘झामू जात्रा’ भी मनाते हैं, जिसमें वे प्रायश्चित के रूप में जलते हुए कोयले पर नंगे पैर चलते हैं तथा अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में इस अवसर को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

भाषा प्रचेता अविनाश

अविनाश


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