पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड
पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड
नयी दिल्ली/लाहौर, 21 मई (भाषा) पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर 2019 में हुए आतंकी हमले का मुख्य साजिशकर्ता अर्जुमंद गुलजार उर्फ बुरहान हमजा बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में मारा गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
हमजा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की कड़ी सुरक्षा में अपनी गतिविधियों को अंजाम देता था और उस पर मुजफ्फराबाद में घात लगाकर हमला किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि हमले में हमजा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे हवाई मार्ग से रावलपिंडी के संयुक्त सैन्य अस्पताल (सीएमएच) ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई से पहले ही हमलावर घटनास्थल से फरार होने में कामयाब रहे।
हमजा मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के खार का रहने वाला था और अल बद्र संगठन से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वह अल बराक नामक आतंकी संगठन में शामिल हो गया और संगठन से मतभेद के बाद अलग होने के बावजूद आईएसआई के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखे।
उसे 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए आत्मघाती आतंकी हमले की साजिश रचने का सूत्रधार होने के आरोप में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम) के तहत अप्रैल 2022 में आतंकवादी घोषित किया गया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की जान चली गई थी।
पुलवामा हमले के बाद से वह पीओके में एक शिक्षक के रूप में गुप्त रूप से रह रहा था।
पीओके की पुलिस के मुताबिक, मुजफ्फरबाद (इस्लामाबाद से लगभग 135 किलोमीटर दूर) के गोजरा में एक निजी कॉलेज के प्राचार्य पद पर कार्यरत बुरहान को बृहस्पतिवार सुबह उस समय निशाना बनाया गया जब वह अपने कॉलेज से बाहर निकल रहा था।
इसने बताया कि हमलावरों ने बहुत करीब से कई गोलियां चलाईं।
पीओके की पुलिस ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में दावा किया, ‘‘बुरहान के सिर में तीन गोलियां लगीं। उसे गंभीर हालत में पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।’’
हालांकि, सूत्रों ने ‘पीटीआई’ को बताया कि बुरहान की हमले में मौत हो गई।
पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार करने और हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद करने का भी दावा किया है।
इस संबंध में एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘‘घटना को अंजाम देने के बाद एक संदिग्ध मोटरसाइकिल पर सवार होकर फरार होने की कोशिश कर रहा था, तभी स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।’’
भारत ने पुलवामा हमले के जवाब में 26 फरवरी, 2019 को हवाई हमले कर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया था।
सूत्रों के मुताबिक, हमजा का उपनाम डॉक्टर भी था। वह मौजूदा समय में मुजफ्फराबाद के बाहरी इलाके में स्थित घनी आबादी वाले चीला बांदी में रह रहा था। उसकी सुरक्षा में आठ कमांडो, एक बुलेट-प्रूफ (बीआर) वाहन और एक एस्कॉर्ट वाहन तैनात किया गया था, जो पाकिस्तान सरकार द्वारा उसे दिए गए महत्व को रेखांकित करता है।
उन्होंने बताया कि जनवरी और फरवरी 2025 के बीच कथित तौर पर खुद पर हमले की मनगढ़ंत कहानी बनाने के बाद उसे सुरक्षा मुहैया कराई गई थी।
हमजा ने अल बराक के पूर्व कमांडर फारूक कुरैशी के साथ मिलकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया। कुरैशी का नाम कश्मीर घाटी में मादक पदार्थों की तस्करी, जाली मुद्रा गिरोह, हथियारों की तस्करी और सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में बार-बार सामने आया है।
सूत्रों ने बताया कि दोनों मुजफ्फरबाद में ‘‘माछिस फैक्टरी’ के नाम से मशहूर एक औद्योगिक परिसर से अपना धंधा चलाते थे।
उन्होंने कहा कि हमजा के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, विशेष रूप से कर्नल रिजवान नामक एक अधिकारी के साथ घनिष्ठ संबंध थे, जो गहरे खुफिया संबंधों और संरक्षण का संकेत देते हैं।
हमजा ने हाल ही में कुपवाड़ा के रहने वाले कादिर लाला की बेटी से शादी की थी, जो हिजबुल मुजाहिदीन का पूर्व सदस्य था और वर्तमान में पाकिस्तान के चक शहजाद में आतंकी समूह की आवासीय परियोजना में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत है।
सूत्रों ने बताया कि उसके पुलवामा के एक अन्य पूर्व हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मुर्तजा से भी घनिष्ठ संबंध थे, जो अब इस्लामाबाद में रहता है, और वह अक्सर उसके आवास पर जाया करता था।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल

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