नस्ली भेदभाव: न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश से मामलों की समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने को कहा
नस्ली भेदभाव: न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश से मामलों की समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने को कहा
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ नस्ली भेदभाव से संबंधित जैसे संवेदनशील मामलों के निपटारे के लिए एक उपयुक्त समयसीमा सुनिश्चित करने के वास्ते एक समग्र नीतिगत निर्णय लेने का अनुरोध किया।
पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ नस्ली भेदभाव के मामलों में समयबद्ध सुनवाई के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर निर्णय की आवश्यकता होती है।
याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली समेत पीठ को दिल्ली में 2014 के एक मामले के बारे में बताया, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के 19 वर्षीय छात्र नीदो तानिया की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
वकील ने कहा कि जिन मामलों में जांच पूरी हो चुकी है और आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, उनमें भी मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय लगता है।
याचिका का निपटारा करते हुए, पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से ‘‘प्रशासनिक पक्ष से ऐसे मुद्दों पर विचार करने और एक समग्र नीतिगत निर्णय लेने का अनुरोध किया, जिससे इस प्रकार के संवेदनशील मुकदमों के निपटारे के लिए एक उपयुक्त समयसीमा सुनिश्चित हो सके।’’
गत 18 फरवरी को एक अलग याचिका की सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि नस्ल, क्षेत्र, जाति और लैंगिक आधार पर व्यक्तियों की पहचान करना एक प्रतिगामी मार्ग पर चलने के बराबर होगा।
इसने पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों के नागरिकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा को रोकने के अनुरोध संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि से जनहित याचिका पर विचार करने और इसे उचित प्राधिकारी को भेजने का अनुरोध किया था।
भाषा देवेंद्र रंजन
रंजन

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