राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के लिए एआई को अपनाने का आह्वान किया

राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के लिए एआई को अपनाने का आह्वान किया

राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के लिए एआई को अपनाने का आह्वान किया
Modified Date: April 15, 2026 / 04:42 pm IST
Published Date: April 15, 2026 4:42 pm IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को व्यापक कल्याण के लिए एक शक्ति के रूप में अपनाने का बुधवार को आह्वान किया और कहा कि यह सरकारों को पहले से कहीं बेहतर सेवा करने के लिए सशक्त बना रही है।

राधाकृष्णन ने यहां ‘सुशासन के लिए एआई’ विषय पर आयोजित पांचवें डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि एआई एक समावेशी, कुशल और विकसित भारत के निर्माण में सहायक है। उन्होंने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने में अग्रणी है, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी क्रांति नहीं बल्कि एक मानवीय क्रांति है। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि अब एआई के माध्यम से संसदीय दस्तावेज कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। उन्होंने समावेशी शासन और भाषाई सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारत के राष्ट्रीय एआई-संचालित भाषा मंच ‘भाषिनी’ पर भी प्रकाश डाला।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई-सहायता प्राप्त टीबी स्क्रीनिंग, एआई-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे उपकरणों और ई-संजीवनी जैसे टेलीमेडिसिन मंचों जैसी योजनाओं के माध्यम से एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कृषि, लघु एवं मध्यम उद्यमों, साइबर सुरक्षा, न्यायपालिका और प्रशासनिक प्रणालियों में भी इसी तरह के परिवर्तनकारी प्रभाव देखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शासन हर क्षेत्र को प्रभावित करता है, उसी प्रकार एआई भी अब हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने भारत एआई मिशन और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी प्रमुख सरकारी पहल पर प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य देश के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

राधाकृष्णन ने दिल्ली में हाल में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का भी जिक्र किया, जहां एआई के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को व्यापक रूप से सराहा गया। उन्होंने बताया कि वैश्विक उद्योग जगत की हस्तियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत की अपार क्षमता पर दृढ़ विश्वास व्यक्त किया।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव


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