सीबीआई निदेशक की चयन प्रक्रिया पर राहुल ने दिया असहमति नोट,कहा:नेता प्रतिपक्ष ‘रबर स्टाम्प’ नहीं

सीबीआई निदेशक की चयन प्रक्रिया पर राहुल ने दिया असहमति नोट,कहा:नेता प्रतिपक्ष 'रबर स्टाम्प' नहीं

सीबीआई निदेशक की चयन प्रक्रिया पर राहुल ने दिया असहमति नोट,कहा:नेता प्रतिपक्ष ‘रबर स्टाम्प’ नहीं
Modified Date: May 13, 2026 / 12:27 am IST
Published Date: May 13, 2026 12:27 am IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक की चयन प्रकिया को लेकर मंगलवार को असहमति का नोट दिया और कहा कि वह इस ‘पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया’ में भाग लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकते। राहुल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष कोई ‘रबर स्टाम्प’ नहीं होता है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार के कदम से लगता है कि चयन प्रक्रिया का मजाक बनाया जा रहा है और किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है।

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक दिल्ली में मंगलवार को प्रधानमंत्री के सात, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर हुई और राहुल गांधी ने भी इस बैठक में हिस्स लिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत भी इस समिति के सदस्य हैं।

बैठक के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे असहमति वाले पत्र को साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘ मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया पर अपनी असहमति दर्ज कराई है। मैं पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता।’

उन्होंने असहमति के नोट में कहा, ‘सीबीआई के अगले निदेशक की सिफारिश करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष के रूप में आपको इसकी कार्यवाही पर अपनी असहमति दर्ज करने के लिए लिख रहा हूं।’

उन्होंने दावा किया, ‘आपकी सरकार ने राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए भारत की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई का बार-बार दुरुपयोग किया है। इस तरह के संस्थागत कब्जे को रोकने के लिए ही नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति में शामिल किया जाता है। अफसोस की बात है कि आपने इस प्रक्रिया में मुझे किसी भी सार्थक भूमिका से वंचित करना जारी रखा है।’

उन्होंने कहा कि बार-बार लिखित अनुरोध के बावजूद उन्हें योग्य उम्मीदवारों की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट या ‘360-डिग्री रिपोर्ट’ (मूल्यांकन रिपोर्ट) प्रदान नहीं की गई। इसके बजाय, मुझसे समिति की बैठक के दौरान पहली बार उम्मीदवारों के मूल्यांकन रिकॉर्ड की जांच करने की उम्मीद की गई थी। ‘360-डिग्री रिपोर्ट’ से मुझे सिरे से वंचित कर दिया गया।’

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रत्येक उम्मीदवार के कामकाज के इतिहास और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इन रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा महत्वपूर्ण है।

उनका यह भी कहना है, ‘बिना किसी कानूनी आधार के जानबूझकर जानकारी देने से इनकार करना, चयन प्रक्रिया का मजाक बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि केवल आपके पूर्व-निर्धारित उम्मीदवार का ही चयन किया जाए।’

राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं आपको याद दिलाता हूं कि मैंने पांच मई, 2025 को पिछली बैठक में अपनी असहमति दर्ज की थी। मैंने आपको 21 अक्टूबर 2025 को भी पत्र लिखकर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के उपाय सुझाए थे, जिसका मुझे कोई जवाब नहीं मिला है।’

उन्होंने दावा किया कि चयन समिति को महत्वपूर्ण जानकारी देने से इनकार करके सरकार ने इसे महज औपचारिकता तक सीमित कर दिया है।

उन्होंने पत्र में कहा, ‘विपक्ष का नेता कोई रबर स्टाम्प नहीं है। मैं इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता।इसलिए मैं कड़े शब्दों में असहमति जताता हूं।’

भाषा हक संतोष संतोष

संतोष


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