राजस्थान पुलिस ने डिजिटल जनगणना के नाम पर साइबर ठगी को लेकर आगाह किया
राजस्थान पुलिस ने डिजिटल जनगणना के नाम पर साइबर ठगी को लेकर आगाह किया
जयपुर, 16 अप्रैल (भाषा) राजस्थान पुलिस ने प्रस्तावित डिजिटल जनगणना की आड़ में साइबर ठगी को लेकर लोगों को आगाह किया है। पुलिस का कहना है कि अपराधी डिजिटल जनगणना की आड़ में फर्जी कॉल, एसएमएस या घर पर दस्तक के जरिये ठगी कर सकते हैं।
साइबर अपराध शाखा ने लोगों को डिजिटल जनगणना की आड़ में ठगी से बचाने के लिए एक परामर्श जारी किया है।
अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर अपराध) वीके सिंह के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से शुरू की जा रही डिजिटल जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं और वे जनगणना अधिकारी बनकर संदिग्ध लिंक या फर्जी कॉल के जरिये लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा सकते हैं।
सिंह के मुताबिक, साइबर अपराधी ठगी के लिए फर्जी कॉल कर सकते हैं और खुद को जनगणना अधिकारी बताकर परिवार, आधार और बैंक खाते की जानकारी मांग सकते हैं। उन्होंने बताया कि अपराधी ‘एनीडेस्क’ या ‘टीमव्यूवर’ जैसे ऐप डाउनलोड करवाकर पीड़ित के फोन का पूरा नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और पल भर में बैंकिंग ऐप से खाते में जमा राशि उड़ा सकते हैं।
सिंह के अनुसार, दूसरे तरीके में ठग घर आकर टैबलेट पर जानकारी भरने का नाटक कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ठग सदस्यों की शिक्षा और सुविधाओं की जानकारी दर्ज करने के बहाने ओटीपी मांग सकते हैं, जो असल में पीड़ित के बैंक खाते से लेनदेन से संबंधित हो सकता है।
सिंह ने बताया कि एक अन्य तरीके में फर्जी एसएमएस में “अपनी जनगणना अपडेट करें, वरना सरकारी सुविधा बंद हो जाएगी” जैसे डरावने संदेशों के साथ लिंक भेजा जा सकता है, जिस पर क्लिक करते ही लोग साइबर ठगी के शिकार हो सकते हैं।
उपमहानिरीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने डिजिटल जनगणना के तहत स्व-गणना की सुविधा दी है, जिसके लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
सिंह ने बताया कि स्व-गणना की अवधि एक मई से 15 मई 2026 तक है। उन्होंने बताया कि यह जनगणना पूरी तरह से निशुल्क है।
भाषा
पृथ्वी पारुल
पारुल

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