रास : जन विश्वास विधेयक को पुन: प्रवर समिति में भेजने की मांग
रास : जन विश्वास विधेयक को पुन: प्रवर समिति में भेजने की मांग
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) मामूली प्रक्रियात्मक और तकनीकी त्रुटियों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के प्रावधान वाले ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026’ में कई खामियां होने का दावा करते हुए राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने इसे पुन: प्रवर समिति में भेजने की मांग की। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि यह विधेयक आजाद भारत में अनेक मामूली गलतियों वाले प्रावधानों को अपराधमुक्त करने की सबसे बड़ी कवायद है जिसमें 1000 से अधिक छोटे जुर्मों को अपराध की श्रेणी से हटाया जा रहा है।
उच्च सदन में जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि जो अपराध हो चुके हैं, उनके बारे में भी इस विधेयक में एक स्पष्ट नीति होनी चाहिए कि उन अपराधों को किस श्रेणी में रखा जाएगा।
राजद के मनोज कुमार झा ने सरकार पर ‘कारपोरेट परस्त’ होने का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘कारपोरेट के प्रति सरकार के झुकाव पर लगाम लगाने की जरूरत है। बीते बरसों में कारपोरेट क्षेत्र को और एमएसएमई क्षेत्र को सरकार ने कितना संरक्षण दिया, यह सर्वविदित है।’’
झा ने कहा ‘‘बीते बरसों में देश के फार्मा क्षेत्र के कुछ मुद्दों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन तक शिकायतें गई हैं।’’
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोल्ला बाबूराव ने कहा कि विधेयक में कई खामियां हैं जिन्हें दूर करने के लिए इसे प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए।
बीजद के निरंजन बिशी ने कहा कि विधेयक के कानून बनने के बाद कमजोर वर्गों और महिलाओं के उत्पीड़न का नया रास्ता खुल जाएगा।
समाजवादी पार्टी के रामजीलाल सुमन ने कहा कि इस कानून को कारोबार की सुगमता के लिए बताया गया है। ‘‘लेकिन असलियत यह है कि यह विधेयक अधिकारियों की शक्तियों को बढ़ाएगा। इससे अपराधों पर लगाम नहीं लगेगी बल्कि उनमें वृद्धि होगी।’’
उन्होंने देश में नकली दवा के कारोबार में वृद्धि होने का दावा करते हुए कहा कि विधेयक में इस पर लगाम कसने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
भाजपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने इस विधेयक को महात्मा गांधी की भावनाओं को और ग्राम स्वराज की उनकी सोच को परिलक्षित करने वाला विधेयक करार देते हुए कहा कि यह विधेयक समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के लिए है।
तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा ने कहा कि कुछ प्रावधानों को अपराध से मुक्त करने का मतलब यह नहीं है कि लोगों को छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया बदली है, सजा से छूट नहीं दी जा रही है।
चर्चा में भाजपा के रामभाई मोकारिया और माया नारोलिया ने भी हिस्सा लिया।
भाषा
मनीषा अविनाश
अविनाश

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