दिल्ली में जनवरी 2025 तक की सभी झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पुनर्वास का लाभ: मुख्यमंत्री
दिल्ली में जनवरी 2025 तक की सभी झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पुनर्वास का लाभ: मुख्यमंत्री
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को बताया कि उनकी सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में एक जनवरी 2025 तक स्थापित सभी पात्र झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पुनर्वास का लाभ देने का फैसला किया है जिससे करीब 20 लाख लोगों के लिए पक्के आवास का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह फैसला गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) की 36वीं बोर्ड बैठक में लिया गया।
गुप्ता ने बताया, “बैठक में तय किया गया कि दिल्ली में एक जनवरी 2025 तक स्थापित सभी पात्र झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा। इस ऐतिहासिक निर्णय से राजधानी की जेजे बस्तियों में रहने वाले लगभग चार से पांच लाख परिवारों यानी करीब 20 लाख लोगों के लिए पक्के और सम्मानजनक आवास का मार्ग प्रशस्त होगा।”
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह निर्णय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हाल में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और ‘दिल्ली स्लम एवं जेजे क्लस्टर पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति 2026’ के तहत लिए गए फैसलों के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल मकान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, “लंबे समय से पुरानी पात्रता तिथि के कारण बड़ी संख्या में परिवार पुनर्वास के लाभ से वंचित रह जाते थे। नई ‘कट-ऑफ’ तिथि तय होने से अब अधिक से अधिक पात्र परिवारों को इसका लाभ मिल सकेगा।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि पात्र परिवारों को सभी आवश्यक नागरिक सुविधाओं से युक्त बहुमंजिला इमारत में फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे और सरकार का प्रयास है कि ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ के संकल्प के अनुरूप पात्र परिवारों का पुनर्वास यथासंभव उनकी बस्ती या उसके आसपास किया जाए।
गुप्ता ने कहा कि नई पुनर्वास कॉलोनियों में बेहतर जीवन के लिए सभी आवश्यक सामाजिक एवं नागरिक सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी जिनमें आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, बच्चों के खेलने के मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “नई नीति में पारिवारिक विस्तार की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। अगर किसी झुग्गी में एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग मंजिलों पर अलग इकाइयों में रह रहे हैं तो निर्धारित अतिरिक्त शुल्क के साथ उन्हें भी पुनर्वास के दायरे में शामिल करने का प्रावधान किए जाने पर विचार किया जा रहा है।”
गुप्ता ने कहा कि सरकार सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से पुनर्वास कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगी ताकि प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
भाषा नोमान नोमान पवनेश
पवनेश

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