बंगाल के बजट में महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए 36,000 करोड़ रुपये का आवंटन

बंगाल के बजट में महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए 36,000 करोड़ रुपये का आवंटन

बंगाल के बजट में महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए 36,000 करोड़ रुपये का आवंटन
Modified Date: June 22, 2026 / 09:24 pm IST
Published Date: June 22, 2026 9:24 pm IST

कोलकाता, 22 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली सरकार के बजट में महिलाओं पर खास ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने महिलाओं से जुड़ी अन्नपूर्णा योजना सहित अन्य कल्याणकारी पहल के लिए 36,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की है।

दासगुप्ता ने सोमवार को राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। उन्होंने महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए 36,000 करोड़ रुपये के आवंटन को “समावेशी विकास” और आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित करने की भाजपा सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया।

अन्नपूर्णा योजना के तहत 25 से 60 साल की पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी। जून में शुरू की गई यह योजना ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में लागू ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की जगह लेगी। इसके दायरे में राज्य की 1.3 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के आने की संभावना है।

बजट में महिला, बाल विकास और समाज कल्याण विभाग को सबसे ज्यादा 52,308 करोड़ रुपये का आवंटन मिला, जिसका मुख्य कारण महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का प्रावधान करने वाली अन्नपूर्णा योजना है।

बजट दस्तावेज और सरकारी बयान के मुताबिक, अन्नपूर्णा योजना का मकसद महिलाओं को आय का एक स्थिर स्रोत उपलब्ध कराना और घर के फैसलों में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस योजना को सरकार के सामाजिक कल्याण एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा था कि बेहतर सत्यापन प्रणाली के जरिये “असली लाभार्थियों” तक लाभ पहुंचाया जाएगा।

सरकार ने महिलाओं के कल्याण को रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा से जुड़ी अपनी योजनाओं से भी जोड़ा। सरकार का तर्क है कि महिलाओं को घर के खर्च में सहयोग देने के साथ-साथ कौशल विकास और आर्थिक भागीदारी के मौके भी मिलने चाहिए।

बजट में दासगुप्ता की ओर से घोषित प्रमुख महिला-केंद्रित पहल में सरकारी नौकरियों में उनके लिए आरक्षण शामिल है।

वित्त मंत्री ने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों में भरी जाने वाली एक लाख नयी रिक्तियों में से 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद कार्यबल में महिला की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

दासगुप्ता ने कहा, “इन पदों में से 20,000 पुलिस विभाग में, 50,000 शिक्षा विभाग में, 1,000 ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स में और बाकी अन्य विभागों में होंगे।”

वित्त मंत्री ने सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेज में पढ़ने वाली अविवाहित छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने और पढ़ाई छोड़ने से रोकने के लिए 50,000 रुपये की एकमुश्त विशेष आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की। उन्होंने इस बाबत 1,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा।

दासगुप्ता ने इस बात को रेखांकित किया कि राज्य सरकार का जोर महिलाओं की सुरक्षा और पुलिसिंग पर है। उन्होंने कहा कि अब राज्य के हर उपमंडल में महिलाओं के लिए एक समर्पित पुलिस थाना और हर पुलिस थाने में उनके लिए एक हेल्प डेस्क होगी।

दासगुप्ता ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। मजबूत संस्थागत व्यवस्थाओं और बेहतर पुलिसिंग के जरिये महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम हर उपमंडल में महिलाओं को समर्पित कम से कम एक पुलिस थाना और हर पुलिस थाने में एक ‘नारी सहायता डेस्क’ बनाएंगे।”

उन्होंने कहा, “शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों और सार्वजनिक जगहों पर गश्त के लिए महिला अधिकारियों से लैस ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, राज्य रिजर्व पुलिस बल में मातंगिनी हाजरा और रानी शिरोमणि के नाम पर महिलाओं की दो बटालियन भी बनाई जाएंगी।”

दासगुप्ता ने केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ का जिक्र किया, जो गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को वेतन के नुकसान की भरपाई का प्रावधान करती है। उन्होंने कमजोर वर्ग के लिए कुल 21,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा करके इस योजना का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।

दासगुप्ता ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को छह पोषण किट भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने महिलाओं को सरकारी बस में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान करने वाली योजना के लिए 550 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की और कहा कि लाभार्थियों को जल्द पिंक कार्ड जारी किए जाएंगे।

दासगुप्ता ने आशा कार्यकर्ताओं समेत जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों का मासिक मानदेय भी 5,000 रुपये बढ़ा दिया।

उन्होंने कहा, “विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) विषयों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने और उन्हें कौशल शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार उच्च शिक्षा हासिल कर रही छात्राओं के लिए हर जिले में पीपीपी मोड में छात्रावास बनाएगी।”

दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल में छह नये महिला कॉलेज खोलने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में ‘सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन’ लगाई जाएंगी।

राजनीतिक विश्लेषक महिलाओं के लिए कल्याणकारी पैकेज की घोषणा को सामाजिक नीति के तहत उठाए गए कदम और रणनीतिक राजनीतिक निवेश, दोनों ही रूपों में देखते हैं।

एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “महिलाओं पर केंद्रित नकद अंतरण योजनाओं ने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई है, जिससे यह क्षेत्र राज्य के हर बजट का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा बन गया है।”

उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में पारित अंतरिम बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 42,000 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि आवंटित की गई थी, जिसमें से 27,500 करोड़ रुपये लक्ष्मी भंडार योजना के लिए तय किए गए थे।”

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश


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