शबरिमला स्वर्ण प्रकरण:टीडीबी के पूर्व प्रमुख के विरूद्ध सबूत मिलने पर नया मामला दर्ज करने की अनुमति

शबरिमला स्वर्ण प्रकरण:टीडीबी के पूर्व प्रमुख के विरूद्ध सबूत मिलने पर नया मामला दर्ज करने की अनुमति

शबरिमला स्वर्ण प्रकरण:टीडीबी के पूर्व प्रमुख के विरूद्ध सबूत मिलने पर नया मामला दर्ज करने की अनुमति
Modified Date: June 29, 2026 / 08:09 pm IST
Published Date: June 29, 2026 8:09 pm IST

कोच्चि, 29 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने शबरिमला में कथित तौर पर सोना गायब होने के प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की उस रिपोर्ट पर सोमवार को एक नया आपराधिक मामला दर्ज करने की इजाजत दी जिसमें कहा गया है कि टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत के खिलाफ सबूत मिले हैं।

एसआईटी ने उच्च न्यायालय को बताया था कि मंदिर के द्वारपालक की मूर्तियों की 2025 में ‘री-प्लेटिंग’ (फिर से परत चढ़ाने) के मामले में प्रशांत के खिलाफ सबूत मिले हैं।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि विशेष जांच दल 2025 में मूर्तियों की ‘री-प्लेटिंग’ के संबंध में नया मामला दर्ज कर सकता है, या 2019 में ‘री-प्लेटिंग’ के दौरान कथित तौर पर सोने के कथित रूप से गायब होने की चल रही जांच में अपनी जांच के नतीजों को शामिल कर सकती है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर इस एसआईटी का गठन किया गया था। इसे दो मामलों की जांच के लिए बनाया गया था: पहला, द्वारपालक मूर्तियों से कथित तौर पर सोना गायब होने का मामला; और दूसरा, श्रीकोविल (गर्भगृह) के सोने की परत वाले चौखट का मामला, जिन्हें वर्ष 2019 में हटाकर ‘री-प्लेटिंग’ के लिए चेन्नई ले जाया गया था।

जांच अधिकारी एस. शशिधरन ने अदालत में एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच में ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कथित साज़िश में सिर्फ मूल आरोपी ही नहीं, बल्कि टीडीबी के अन्य अधिकारी और सदस्य भी शामिल थे।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की परत चढ़ी द्वारपालक की मूर्तियों को मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोटी के कहने पर 2019 में चेन्नई ले जाया गया था। इन मूर्तियों पर 1998 में सोने की परत चढ़ाई गई थी ।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चेन्नई में दोबारा परत चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान, सोने की असली परत हटा दी गई थी और नई परत चढ़ाने के लिए बहुत कम सोना लगाया गया एवं बाकी सोना हड़प लिया गया।

आरोप है कि काम की गुणवत्ता खराब होने के बावजूद, शक से बचने के लिए ‘गोल्ड प्लेटिंग’ पर 40 साल की वारंटी का झूठा प्रमाणपत्र जारी किया गया। हालांकि, कुछ ही महीनों में ‘प्लेटिंग’ खराब हो गई और उसके नीचे की तांबे की सतह दिखने लगी।

एसआईटी के अनुसार, इसके बाद आरोपियों ने 2019 में की गई कथित गड़बड़ी को छिपाने के लिए, सोने की नयी परत चढ़ाने के बहाने मूर्तियों को फिर से चेन्नई ले जाने की एक और आपराधिक साजिश रची।

एसआईटी का आरोप है कि नवंबर 2023 में प्रशांत के टीडीबी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद, पॉटी ने उनका भरोसा जीता और उन्हें नए सिरे से ‘री-प्लेटिंग’ का प्रस्ताव आगे बढ़ाने के लिए मना लिया।

मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

भाषा

राजकुमार संतोष

संतोष


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