मप्र में रेत माफिया ने वनकर्मी को वाहन से कुचला: उच्चतम न्यायालय में अगले सप्ताह सुनवाई

मप्र में रेत माफिया ने वनकर्मी को वाहन से कुचला: उच्चतम न्यायालय में अगले सप्ताह सुनवाई

मप्र में रेत माफिया ने वनकर्मी को वाहन से कुचला: उच्चतम न्यायालय में अगले सप्ताह सुनवाई
Modified Date: April 9, 2026 / 03:46 pm IST
Published Date: April 9, 2026 3:46 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश में एक वन आरक्षक की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हत्या किए जाने के मुद्दे को उठाने वाली अर्जी पर बृहस्पतिवार को अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई।

आरोप है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली का संचालन रेत माफियाओं द्वारा किया जा रहा था।

यह मामला न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष उठाया गया, जो ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के लिए खतरा’ शीर्षक से एक स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई कर रही है।

मामले का जिक्र पीठ के समक्ष करने वाले वकील ने कहा कि यह अर्जी राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से संबंधित लंबित स्वतः संज्ञान मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमित्र ने दायर किया था।

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है। यह तीन राज्यों में 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला संरक्षित क्षेत्र है। लुप्तप्राय घड़ियाल (लंबी नाक वाले मगरमच्छ) के अलावा, यह कछुए की एक प्रजाति ‘रेड-क्राउंड रूफ्ड टर्टल’ और गंगा नदी में पाई जाने वाली लुप्तप्राय डॉल्फिन का भी वास स्थान है।

राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगे स्थान पर, चंबल नदी के तट पर स्थित अभयारण्य को पहली बार 1978 में मध्यप्रदेश में एक संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था और अब यह तीनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित एक लंबा और संकरा पारिस्थितिक रूप से संरक्षित क्षेत्र है।

वकील ने पीठ को बताया, ‘‘न्यायमित्र के रूप में हमने इस मामले में एक नयी अंतरिम अर्जी (आईए) दायर की है ताकि न्यायाधीशों को कल हुई एक बेहद गंभीर घटना के बारे में सूचित किया जा सके, जिसमें ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास करने वाले एक वन आरक्षक की कुचलकर हत्या कर दी गई।’’

वकील ने आग्रह किया कि स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई 11 मई को सूचीबद्ध की गई थी और उससे पहले अंतरिम अर्जी पर सुनवाई की जानी चाहिए।

पीठ ने कहा कि वह 13 अप्रैल को इस अर्जी पर सुनवाई करेगी।

पीठ ने वकील से कहा, ‘‘कुछ और घटनाएं हुई हैं। आपको कुछ बेहद गंभीर घटनाओं का पता चलेगा।’’

पुलिस ने बताया था कि बुधवार सुबह मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खननकर्मियों की एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने 35 वर्षीय वन आरक्षक को कुचल दिया।

पुलिस ने बताया कि घटना जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर रणपुर गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-552 पर उस समय हुई जब वनकर्मियों ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की, जिस पर रेत लदी हुई थी।

पुलिस के अनुसार, गश्त दल के सदस्य वन आरक्षक हरकेश गुर्जर ने वाहन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वाहन चालक ने उन्हें कुचल दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

उच्चतम न्यायालय ने दो अप्रैल को स्वतः संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई करते हुए अवैध रेत खनन को ‘‘बढ़ावा देने’’ के लिए राजस्थान सरकार की आलोचना की और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के 732 हेक्टेयर क्षेत्र को गैर-अधिसूचित करने वाली उसकी अधिसूचना पर रोक लगा दी। साथ ही, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह संरक्षित प्रजातियों के लिए किसी भी संरक्षित भूमि को गैर-अधिसूचित करने की अनुमति नहीं देगा।

उच्चतम न्यायालय ने खनन माफिया को ‘‘डकैत’’ करार देते हुए कहा कि राजस्थान में खनन माफिया ने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और पुलिसकर्मियों सहित कई सरकारी अधिकारियों की हत्या की है।

भाषा सुरभि सुभाष

सुभाष


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