मानहानि मामले में न्यायालय ने आतिशी, केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक स्थगित की

मानहानि मामले में न्यायालय ने आतिशी, केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक स्थगित की

मानहानि मामले में न्यायालय ने आतिशी, केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक स्थगित की
Modified Date: January 27, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: January 27, 2026 4:10 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की उस याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी, जिसमें उन्होंने मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी कथित टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और एन. के. सिंह की पीठ ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी कि इसमें विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।

आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने बताया कि पीठ ने कहा था कि इस मामले को नियमित मामलों की सुनवाई वाले दिन(मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार) को सुना जाना चाहिये और इसी आधार पर उन्होंने मामले की सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने बताया कि मानहानि का मामला एक राजनीतिक दल से संबंधित है, जिसने शिकायतकर्ता को अपनी ओर से याचिका दायर करने के लिए अधिकृत किया है।

उच्चतम न्यायालय ने 30 सितंबर, 2024 को शिकायतकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत के समक्ष जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

इसने कहा था कि कानूनी सवाल यह है कि क्या शिकायतकर्ता या कोई राजनीतिक दल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199 के अंतर्गत ‘‘असंतुष्ट व्यक्तियों’’ की परिभाषा के दायरे में आएगा।

हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि ये आरोप प्रथम दृष्टया ‘‘मानहानिकारक’’ हैं और भाजपा को बदनाम करने तथा अनुचित राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के इरादे से लगाए गए हैं।

उच्च न्यायालय ने आतिशी, केजरीवाल, पूर्व राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार गुप्ता और आम आदमी पार्टी के नेता मनोज कुमार द्वारा निचली अदालत में लंबित मानहानि की कार्यवाही के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था।

इसने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि) और 500 (मानहानि के लिए दंड) के तहत अपराधों के लिए निचली अदालत द्वारा पारित समन आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

इसके बाद, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सत्र न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा गया था, जिसमें बब्बर की शिकायत पर उन्हें आरोपी के रूप में तलब किया गया था।

आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मजिस्ट्रेट अदालत के 15 मार्च, 2019 के आदेश और सत्र न्यायालय के 28 जनवरी, 2020 के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया।

भाजपा की दिल्ली इकाई की ओर से मानहानि की शिकायत दर्ज कराने वाले बब्बर ने याचिका में कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाकर भाजपा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया, जिसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 2018 में एक संवाददाता सम्मेलन में, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि भाजपा के निर्देशों पर निर्वाचन आयोग ने बनिया, पूर्वांचली और मुस्लिम समुदायों के 30 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए।

केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने दावा किया कि निचली अदालत यह समझने में विफल रही कि उनके खिलाफ मानहानि या किसी अन्य प्रकार का कोई अपराध नहीं बनता है।

भाषा

नेत्रपाल दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में