न्यायालय ने खतरनाक व रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों को ‘‘जान से मारने’’ की अनुमति दी
न्यायालय ने खतरनाक व रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों को ‘‘जान से मारने’’ की अनुमति दी
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या खतरनाक आवारा कुत्तों को ‘‘जान से मारने’’ (यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए।
पीठ ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि आवारा कुत्तों को ‘‘जान से मारने’’ का निर्देश स्थानीय निकायों और संबंधित अधिकारियों को जारी किए गए आदेशों में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश है।
अदालत ने कहा कि जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई हो और जहां बार-बार कुत्तों के काटने या आक्रामक हमलों से जनसुरक्षा को लगातार खतरा पैदा हो रहा हो, वहां स्थानीय अधिकारी कुत्तों को ‘‘जान से मारने’’ का निर्णय ले सकते हैं।
पीठ ने कहा कि यह कदम और अन्य कानूनी उपाय पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के आकलन के बाद तथा ‘पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’, ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023’ और अन्य लागू वैधानिक प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए उठाए जाएं।
शीर्ष अदालत ने यह आदेश पिछले वर्ष 28 जुलाई को स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले की सुनवाई के दौरान पारित किया। इस मामले में राष्ट्रीय राजधानी में, विशेषकर आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों को काटने से रेबीज फैलने की घटनाओं का उल्लेख किया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के स्थानांतरण और बंध्याकरण संबंधी अपने पूर्व के आदेशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाएं और आवेदन भी मंगलवार को यह कहते हुए खारिज कर दिए कि सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार में कुत्तों के हमलों के भय से मुक्त होकर जीने का अधिकार भी शामिल है।
पीठ ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अदालत उन कठोर जमीनी हकीकतों से आंखें नहीं मूंद सकती, जिनमें बच्चे, विदेशी पर्यटक और बुजुर्ग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं।”
अदालत ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने संबंधी निर्देश राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और अन्य वैधानिक निकायों को भी जारी किए।
शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष सात नवंबर को शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे स्थानों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं में “चिंताजनक वृद्धि” पर संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को बंध्याकरण और टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रय स्थलों में भेजा जाए।
भाषा
खारी नरेश
नरेश

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