राज्य बार काउंसिल में एससी-एसटी आरक्षण के लिए जनहित याचिका पर विचार से न्यायालय का इनकार

राज्य बार काउंसिल में एससी-एसटी आरक्षण के लिए जनहित याचिका पर विचार से न्यायालय का इनकार

राज्य बार काउंसिल में एससी-एसटी आरक्षण के लिए जनहित याचिका पर विचार से न्यायालय का इनकार
Modified Date: January 27, 2026 / 04:58 pm IST
Published Date: January 27, 2026 4:58 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न राज्य बार काउंसिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वकीलों के लिए आरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इंकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति आर महादेवन तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यह याचिका देर से दाखिल की गई। उन्होंने कहा कि चुनावों के लिए इस तरह की मांग में बहुत देर हो चुकी है।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने विभिन्न राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के लिए प्रतिनिधित्व जरूरी करने वाले शीर्ष अदालत के पहले के आदेश का हवाला दिया।

याचिकाकर्ताओं के वकीलों, जिनमें राम कुमार गौतम भी शामिल थे, ने तर्क दिया कि विभिन्न राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व पर आदेश जारी किए गए थे जबकि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में आरक्षण या प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “आप हर जगह हैं। न्यायपालिका में, वकीलों के बीच, संसद में…..बार काउंसिल 1961 से है, और आपने कुछ नहीं किया। सिर्फ इसलिए कि उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं के लिए कुछ किया, तो आप अब आ गए! आप बस इसे थाली में परोसा हुआ चाहते हैं।”

पहले के निर्देशों के दायरे पर स्पष्टीकरण देते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पीठ ने महिला वकीलों को “आरक्षण” नहीं दिया, बल्कि लंबे समय से चली आ रहीं कम प्रतिनिधित्व की समस्या पर ध्यान देने के लिए उनके प्रतिनिधित्व को अनिवार्य किया है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमने महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं दिया है; यह सिर्फ प्रतिनिधित्व है।”

उन्होंने यह भी कहा कि महिला वकीलों को दी गई राहत काफी समय तक लगातार चले वाद का नतीजा है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं की इस बात के लिए आलोचना की कि वे चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत में आए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप अगले चुनाव के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं।”

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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