सिद्धरमैया सरकार कर्नाटक के इतिहास की सबसे अलोकप्रिय सरकार : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

सिद्धरमैया सरकार कर्नाटक के इतिहास की सबसे अलोकप्रिय सरकार : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

सिद्धरमैया सरकार कर्नाटक के इतिहास की सबसे अलोकप्रिय सरकार : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
Modified Date: February 5, 2024 / 06:58 pm IST
Published Date: February 5, 2024 6:58 pm IST

बेंगलुरू, पांच फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य की कथित रूप से बिगड़ती वित्तीय स्थिति को लेकर सोमवार को कांग्रेस सरकार की आलोचना की और सिद्धरमैया प्रशासन पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने मौजूदा सरकार को कर्नाटक के इतिहास में सबसे अलोकप्रिय करार देते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी परेशानियों के लिए केंद्र को ‘अनावश्यक रूप से’ दोषी ठहरा रही है।

विजयेंद्र ने किसानों के लिए प्रोत्साहन योजना और विधायकों के विकास कोष से संबंधित दो मुद्दों का विशेष रूप से जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि डेयरी किसानों के लिए बीएस येदियुरप्पा नीत पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई प्रोत्साहन योजना को बंद कर दिया है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि दूध उत्पादकों का कुल 700 करोड़ रुपये बकाया है, जिसका भुगतान पिछले कुछ महीनों से लंबित है।

विजयेंद्र ने राज्य में सूखे का हवाला देते हुए मांग की कि वित्त विभाग का भी प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री सिद्धरमैया संकटग्रस्त डेयरी किसानों को बकाया तुरंत जारी करें। उन्होंने आगाह किया, ‘अन्यथा किसान मवेशियों के साथ…सड़कों पर आएंगे और राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।’

उन्होंने सवाल किया, ‘क्या सूखे के दौरान किसानों को राहत पहुंचाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?’

उन्होंने हर मौके पर ‘अनावश्यक रूप से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोष देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करने’ के लिए कांग्रेस नेताओं की आलोचना की।

विधायकों के विकास कोष के मुद्दे पर उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा कोई राशि नहीं जारी की गई है।

उन्होंने दावा किया, ”राज्य की वित्तीय स्थिति…दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है।” उन्होंने कहा, ”यह कर्नाटक के इतिहास की सबसे अलोकप्रिय राज्य सरकार है।”

भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में दलित संकट में हैं क्योंकि सरकार ने उनके कल्याण के लिए आवंटित ‘11,600 करोड़ रुपये के पूरे कोष को अन्य कार्यक्रमों में लगा दिया है।

भाषा अविनाश प्रशांत

प्रशांत


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