सिद्धरमैया ने प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञापन सौंप आरक्षण सहित 18 मुद्दों पर हस्तक्षेप का अनुरोध किया
सिद्धरमैया ने प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञापन सौंप आरक्षण सहित 18 मुद्दों पर हस्तक्षेप का अनुरोध किया
(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, 15 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 18 मुद्दों पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य की 56 प्रतिशत आरक्षण नीति को संवैधानिक संरक्षण देने और घाटा अनुदान जारी करने की मांग भी शामिल है।
सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य की योजनाओं को मंजूरी और धन जारी करने में केंद्र सरकार की ओर से बार-बार होने वाली देरी से व्यवस्थागत भेदभाव की धारणा पैदा हुई है।
मुख्यमंत्री ने संविधान की नौवीं अनुसूची में कर्नाटक के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति(एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 56 प्रतिशत आरक्षण संबंधी कानून को शामिल करने और एसटी की केंद्रीय सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)की कुछ जातियों को शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।
उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान, बेंगलुरु को विशेष अनुदान जारी करने और मेकेदातु परियोजना को मंजूरी देने सहित अन्य पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान के मुताबिक मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरि जाने के लिए प्रधानमंत्री शहर के एचएएल हवाई अड्डे पर पहुंचे थे और उसी समय मुख्यमंत्री ने उन्हें ज्ञापन सौंपा।
सिद्धरमैया ने मोदी को लिखे पत्र में कहा, ‘‘कर्नाटक ने हमेशा जिम्मेदारी और दूरदर्शिता के साथ भारत के विकास में योगदान देने में गर्व महसूस किया है। हालांकि, मंजूरी और धन जारी करने में बार-बार होने वाली देरी ने प्रणालीगत असमानता की धारणा पैदा की है। इन चिंताओं को दूर करने से सच्चे सहकारी संघवाद की भावना मजबूत होगी और भारत के विकास के लिए हमारी साझा दृष्टि मजबूत होगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक के लोग इन मुद्दों के समाधान में आपके हस्तक्षेप की आशा करते हैं। मुझे भरोसा है कि केंद्र सरकार कर्नाटक को भारत के समावेशी और सतत विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगी।’’
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘हमारा राज्य प्रगतिशील और समावेशी भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है और सहकारी संघवाद के आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।’’
उन्होंने कहा, हालांकि कर्नाटक राष्ट्रीय खजाने में सबसे बड़ा योगदान देने वालों में से एक है तथा आर्थिक और सामाजिक विकास में अग्रणी है, कुछ लंबे समय से लंबित मुद्दों पर केंद्र सरकार को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि रेल बजट में घोषित कोलार रेलवे कोच फैक्टरी के लिए राज्य द्वारा 1,123 एकड़ भूमि की पेशकश के बावजूद इसे अमली जामा नहीं पहनाया गया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को पुनर्जीवित करने से पिछड़े कोलार क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
सिद्धरमैया ने कहा कि प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में बेंगलुरु-मैसूरु खंड को शामिल करना संतुलित क्षेत्रीय विकास और संपर्क बढ़ाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सम्मानपूर्वक केंद्र सरकार से बेंगलुरु उपनगरीय रेल परियोजना के लिए प्रतिबद्ध केंद्रीय सहायता जारी करने में तेजी लाने और कित्तूर कर्नाटक और कल्याण कर्नाटक के प्रमुख जिलों को जोड़ने वाले बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शुरू करने का आग्रह करता है।
मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत सुरक्षित पेयजल तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 17,554 करोड़ रुपये के लंबित केंद्रीय अंश को जारी करने की मांग की।
सिद्धरमैया ने कहा कि ग्राम पंचायतों को 15वें वित्त आयोग के तहत अनुदान जारी करने की सभी शर्तें पूरी करने के बावजूद कर्नाटक को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,860 करोड़ रुपये का अनुदान आंवटित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘ग्रामीण बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए समय पर राशि का आंवटन महत्वपूर्ण है।’’
मुख्यमंत्री ने इसी के साथ प्रधानमंत्री मोदी को सौंपे ज्ञापन में लंबित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं, राजस्व घाटा के मद में 5495 करोड़ रुपये जारी करने, बेंगलुरु जल संकट के समाधान के लिए मेकेदातु परियोजना और लंबित सिंचाई परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया।
भाषा धीरज माधव
माधव

Facebook


