उत्तराखंड में यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि
उत्तराखंड में यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि
देहरादून, 12 जनवरी (भाषा) समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय तेजी आई है और पुराने अधिनियम के मुकाबले इसमें प्रतिदिन की औसत संख्या में 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है ।
यहां जारी एक विज्ञप्ति में आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि प्रदेश में पिछले साल 27 जनवरी को यूसीसी लागू होने के बाद जुलाई 2025 तक केवल पहली छमाही में ही यह आंकड़ा बढ़कर तीन लाख के पार पहुंच गया ।
इसके विपरीत, उत्तराखंड अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2010 के तहत 2010 और 2025 के बीच की 15 वर्षों की अवधि के दौरान कुल 3,30,064 विवाह पंजीकृत हुए थे।
विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिदिन के औसत पर यदि नजर डाली जाए तो पुराने अधिनियम के तहत प्रतिदिन केवल 67 विवाह पंजीकृत होते थे, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 1,634 तक पहुंच गई है ।
विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद आम लोगों में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पुराने अधिनियम के मुकाबले विवाह पंजीकरण कराने वालों की प्रतिदिन की औसत संख्या में 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।’’
धामी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का वादा किया था और सत्ता में आने के बाद मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में इसे लागू करने का निर्णय लिया। सभी औपचारिकताओं और व्यापक जनमत संग्रह के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून लागू कर दिया गया।
विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘मुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक फैसला सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया साहसिक कदम है जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों को, विशेष रूप से महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है।’’
इसमें कहा गया कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, सहवासी संबंध और इनसे जुड़े प्रावधानों को यूसीसी में शामिल किया गया है।
विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘इस कानून के तहत महिला एवं पुरुषों के लिए विवाह की आयु निर्धारित की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक एवं अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान और कड़े प्रावधान किए गए हैं। यूसीसी के लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।’’
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा, ‘‘उत्तराखंड में यूसीसी लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देना है।’’
उन्होंने कहा कि विवाह पंजीकरण में आई उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि उत्तराखंड ने पूरे देश को एक नयी दिशा देने का कार्य किया है और आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।
भाषा दीप्ति
सिम्मी
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