अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए बेटे ने परिवार का जीवन संवारने का वादा मरकर भी पूरा किया
अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए बेटे ने परिवार का जीवन संवारने का वादा मरकर भी पूरा किया
अहमदाबाद, आठ जून (भाषा) अहमदाबाद विमान दुर्घटना में अपने बेटे महेश जीरावाला को खोने के लगभग एक साल बाद भी 62 वर्षीय गिरधरभाई कलावड़िया इस दुख से उबर नहीं पाए हैं, लेकिन उन्हें इस बात की तसल्ली है कि उनके बेटे ने परिवार का जीवन संवारने का जो वादा किया था उसे मरकर भी पूरा किया।
विमान हादसे के बाद मिले मुआवजे से खरीदे गए दो कमरों वाले फ्लैट में बैठे शोक संतप्त पिता कहते हैं कि उनके बेटे ने अंततः अपना वादा निभा दिया।
गिरधरभाई यहां नरोदा इलाके में अपने फ्लैट में अपनी पत्नी, छोटे बेटे कार्तिक और पोती (कार्तिक की बेटी) के साथ रहते हैं। परिवार इस त्रासदी के बाद जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है लेकिन महेश की अनुपस्थिति उन्हें हर दिन उदास कर देती है।
गिरधरभाई ने 12 जून को यहां एअर इंडिया विमान दुर्घटना की पहली बरसी से पहले ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम बिखरी हुई ज़िंदगी को फिर से समेटने की कोशिश कर रहे हैं। माता-पिता अपने बेटे को कैसे भूल सकते हैं? आज भी हर शाम मुझे लगता है कि वह घर लौट आएगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महेश हमेशा मुझसे कहा करता था कि चिंता मत करो। मेरी हार्ट सर्जरी के बाद उसने वादा किया था कि वह सारे कर्ज़ चुका देगा और परिवार के लिए एक घर खरीदेगा। आज उसी की बदौलत हम अपने घर में रह रहे हैं। मेरे बेटे ने अपनी मृत्यु के बाद भी अपना वादा निभाया।’’
महेश कलावड़िया को महेश जीरावाला के नाम से भी जाना जाता था और वह उन लोगों में शामिल हैं जिनकी मौत, पिछले वर्ष एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 के यहां से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद मेघानीनगर क्षेत्र में स्थित एक मेडिकल हॉस्टल परिसर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त होने से हुई थी। इस दुर्घटना में 19 ऐसे लोगों की मौत हो गई थी जो विमान में सवार नहीं थे और महेश भी उनमें से एक थे।
महेश जीरावाला (34) गुजराती गीतों और एल्बमों का निर्माण तथा निर्देशन करते थे और विमान हादसे के वक्त वह दुर्घटनास्थल के पास वाली सड़क से स्कूटर से गुजर रहे थे।
हादसे से पहले के दिनों को याद करते हुए गिरधरभाई ने बताया कि विमान दुर्घटना से महज़ दो सप्ताह पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं हीरा पॉलिशिंग यूनिट में काम करता था। सर्जरी के बाद मैं काम करने की स्थिति में नहीं था। तब महेश ने मुझसे कहा कि मैं नौकरी छोड़कर घर पर आराम करूं। उसने कहा था कि वह परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी संभालेगा और दिवाली से पहले नया घर खरीदकर देगा।’’
उस समय छह सदस्यों का यह परिवार अहमदाबाद के नरोदा क्षेत्र में एक किराए के मकान में रहता था और बढ़ते कर्ज़ के बोझ से जूझ रहा था। परिवार में महेश, उनकी पत्नी हेतल, उनके माता-पिता, छोटे भाई कार्तिक और कार्तिक की छह वर्षीय बेटी साथ रह रहे थे।
महेश की मौत के बाद, परिवार को एअर इंडिया, टाटा समूह और गुजरात सरकार की ओर से कुल मिलाकर 1.29 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला।
गिरधरभाई के अनुसार, मुआवजे की राशि में से महेश की पत्नी को 54 लाख रुपये मिले, बाद में वह अपने मायके चली गई।
उन्होंने कहा, ‘‘महेश की शादी घटना से महज तीन महीने पहले ही हुई थी। कार्तिक का पहले ही तलाक हो चुका था और अब उसकी बेटी हमारे साथ रहती है।’’
गिरधरभाई ने बताया कि मुआवजे की शेष राशि में से परिवार ने सबसे पहले लगभग 15 लाख रुपये का कर्ज़ चुकाया।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद मैंने नरोदा क्षेत्र में लगभग 45 लाख रुपये में यह फ्लैट खरीदा और अपने बेटे की इच्छा पूरी की। लगभग 10 लाख रुपये फर्नीचर पर खर्च किए गए, जबकि पांच लाख रुपये पोती के लिए जमा कर दिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब उस पैसे में से कुछ भी नहीं बचा है, लेकिन मुझे इस बात की तसल्ली है कि महेश ने अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने की व्यवस्था करा दी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महेश को अपने माता-पिता, भाई और उसकी बेटी, हर किसी की चिंता रहती थी। आज हमारी जो भी गरिमा है, वह केवल उसी की बदौलत है।’’
भाषा शोभना वैभव
वैभव

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