स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय में वंदे मातरम् पर विशेष प्रदर्शनी

स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय में वंदे मातरम् पर विशेष प्रदर्शनी

स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय में वंदे मातरम् पर विशेष प्रदर्शनी
Modified Date: August 8, 2026 / 09:12 pm IST
Published Date: August 8, 2026 9:12 pm IST

नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय एक प्रदर्शनी आयोजित कर रहा है, जिसमें कई तरह की वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इनमें वंदे मातरम् पर जारी स्मृति डाक टिकट, वर्ष 1976 में इसके रचयिता के सम्मान में जारी विशेष प्रथम दिवस आवरण और चंदन की लकड़ी पर नक्काशी करके बनाई गई भारत माता की मूर्ति शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि शनिवार से शुरू हुई पांच दिवसीय प्रदर्शनी में एक पुराने तिरंगे को भी प्रदर्शित किया गया है, जिसके बीच में देवनागरी लिपि में वंदे मातरम् लिखा हुआ है।

यह आयोजन 15 अगस्त को मनाए जाने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोहों के तहत तीन मूर्ति भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय के नए खंड में आयोजित किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी आठ से 12 अगस्त तक आयोजित की जा रही है।

प्रदर्शनी वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान का भी उत्सव मना रही है।

इसमें प्रदर्शित अन्य वस्तुओं में सजावटी बटन का एक सेट भी शामिल है, जिन पर पृष्ठभूमि में पुराने तिरंगे के साथ देवनागरी लिपि में वंदे मातरम् अंकित है।

प्रदर्शनी में वंदे मातरम् पर जारी स्मृति डाक टिकट और इसके रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के सम्मान में वर्ष 1976 में जारी विशेष प्रथम दिवस आवरण के साथ-साथ भारतीय डाक द्वारा नवंबर 2025 में जारी स्मृति डाक टिकट भी प्रदर्शित किए गए हैं।

इसके अलावा, प्रदर्शनी में ‘आनंदमठ’ की प्रतियां भी प्रदर्शित की गई हैं, जिसमें वर्ष 1882 में पहली बार वंदे मातरम् को पूरी तरह बांग्ला भाषा में प्रकाशित किया गया था। इसके साथ ही वर्ष 1909 में अरविंद घोष द्वारा किए गए इसके अंग्रेजी अनुवाद की एक प्रति भी प्रदर्शनी का हिस्सा है।

इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनी में शामिल कुछ वस्तुएं प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) के तोशाखाना संग्रह से ली गई हैं।

बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा वर्ष 1875 में रचित वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक प्रमुख नारे के रूप में उभरा और इसने आंदोलन को नयी ऊर्जा दी।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल


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