उपग्रहों में दोबारा ईंधन भरने की तकनीक का प्रदर्शन करेगी स्टार्टअप कंपनी ऑर्बिटएड

उपग्रहों में दोबारा ईंधन भरने की तकनीक का प्रदर्शन करेगी स्टार्टअप कंपनी ऑर्बिटएड

उपग्रहों में दोबारा ईंधन भरने की तकनीक का प्रदर्शन करेगी स्टार्टअप कंपनी ऑर्बिटएड
Modified Date: January 11, 2026 / 04:31 pm IST
Published Date: January 11, 2026 4:31 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) चेन्नई में स्थित एक अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनी ऐसी तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है, जिससे पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे उपग्रहों में दोबारा ईंधन भरा जा सकेगा। इससे उनके इस्तेमाल की अवधि बढ़ेगी और अंतरिक्ष में मलबा जमा होने की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

‘ऑर्बिटएड एयरोस्पेस’ सोमवार को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) के जरिये ‘आयुलसैट’ नामक एक विशेष टैंकर-सैटेलाइट पेश करने वाली है। यह अपने ‘स्टैंडर्ड इंटरफेस फॉर डॉकिंग एंड रिफ्यूलिंग पोर्ट’ (एसआईडीआरपी) के माध्यम से उपग्रह में ईंधन, बिजली और डेटा के अंतरण को प्रदर्शित करेगी।

ऑर्बिटएड के संस्थापक और सीईओ शक्तिकुमार रामचंद्रन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम सबसे पहले उपग्रह में एक टैंक से दूसरे टैंक में ईंधन के स्थानांतरण का प्रदर्शन करेंगे।”

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रामचंद्रन ने बताया कि आयुलसैट भारत का पहला वाणिज्यिक डॉकिंग और रिफ्यूलिंग इंटरफेस होगा, जिसे कक्षा में तैनात किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “जल्द ही हमारी कक्षा में फ्यूल स्टेशन होंगे, जो ‘लो-अर्थ ऑर्बिट’ और ‘जियो-सिंक्रोनस ऑर्बिट’ दोनों में उपग्रहों के इस्तेमाल की अवधि बढ़ाने में मदद करेंगे।”

उन्होंने बताया कि इसी साल के अंत में ऑर्बिटएड एक और उपग्रह ‘चेजर सैटेलाइट’ पेश करेगा, जो आयुलसैट से जुड़कर कक्षा में वास्तविक रिफ्यूलिंग का प्रदर्शन करेगा।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश


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