रणनीतिक स्वायत्तता कूटनीतिक आकांक्षा नहीं,बल्कि देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हेतु जरूरी:अधिकारी

रणनीतिक स्वायत्तता कूटनीतिक आकांक्षा नहीं,बल्कि देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हेतु जरूरी:अधिकारी

रणनीतिक स्वायत्तता कूटनीतिक आकांक्षा नहीं,बल्कि देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा हेतु जरूरी:अधिकारी
Modified Date: April 2, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: April 2, 2026 8:03 pm IST

जयपुर, दो अप्रैल (अप्रैल) सेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान के ‘कमांडर इन चीफ’ लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार को भू-राजनीतिक अस्थिरता और जटिल सुरक्षा चुनौतियों के दौर में रणनीतिक स्वायत्तता की अनिवार्यता पर जोर दिया।

वह ‘मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल’ तथा ‘सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज’ के सहयोग से आयोजित छठे जनरल के. सुंदरजी स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में, जब महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा, भू-आर्थिक विखंडन, तकनीकी मुकाबला और क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ रहे हैं, तब रणनीतिक स्वायत्तता अब केवल एक कूटनीतिक आकांक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रों के लिए अपनी संप्रभुता, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और दीर्घकालिक हितों की रक्षा हेतु व्यावहारिक आवश्यकता है।”

संगोष्ठी का विषय “एक बढ़ती हुई विभाजित दुनिया में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की चुनौतियां” था।

कार्यक्रम में पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन और ‘यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’ के महानिदेशक वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह भी शामिल हुए।

एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया, “मुख्य चर्चाएं भारत की विदेश नीति को बहुध्रुवीय विश्व में पुनः संतुलित करने, उभरती तकनीकों और भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा का राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव, रक्षा तैयारियों को मजबूत करने, संयुक्तता और स्वदेशीकरण, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा तथा आर्थिक एकीकरण और राष्ट्रीय लचीलापन के बीच संतुलन पर केंद्रित रहीं।”

भाषा बाकोलिया

राजकुमार

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