सुधाकरन ने भाई के स्मारक पर श्रद्धांजलि को लेकर की गयी टिप्पणियों के लिए माकपा नेताओं की आलोचना की
सुधाकरन ने भाई के स्मारक पर श्रद्धांजलि को लेकर की गयी टिप्पणियों के लिए माकपा नेताओं की आलोचना की
अलप्पुझा (केरल), सात मई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पूर्व नेता जी. सुधाकरन ने बृहस्पतिवार को वामपंथी नेताओं की उनके दिवंगत भाई भुवनेश्वरन को श्रद्धांजलि देने को लेकर की गयी टिप्पणियों के लिए आलोचना की। भुवनेश्वरन को पार्टी शहीद मानती है।
जी.भुवनेश्वरन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता थे, जिनकी 1977 में पंडालम के एनएसएस कॉलेज में हिंसा के दौरान हत्या कर दी गयी थी।
यूडीएफ समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अंबलपुझा से विधानसभा चुनाव जीतने वाले सुधाकरन ने बुधवार को अपनी चुनावी जीत के बाद अलप्पुझा जिले के चारुम्मूडु स्थित शहीद स्मारक पर जाकर भुवनेश्वरन को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
माकपा के स्थानीय नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सुधारकन ने माकपा के खिलाफ यूडीएफ समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर अपने भाई के साथ ‘‘विश्वासघात’’ किया है।
यह मुद्दा चुनाव प्रचार के दौरान भी उठाया गया था।
बृहस्पतिवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में सुधाकरन ने इस आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें यह कहने का क्या अधिकार है? क्या भुवनेश्वरन के नाम पर ऐसी बातें कही जानी चाहिए? अगर कोई शहीद को श्रद्धांजलि देने पर आलोचना करता है, तो वह आखिर किसे मूर्ख बनाना चाहता है?’’
उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान भुवनेश्वरन का मुद्दा उठाने के कारण माकपा को वोटों का नुकसान हुआ।
सुधाकरन ने यह भी कहा कि शहीद स्मारक का निर्माण परिवार ने कराया था, न कि पार्टी ने। उन्होंने बताया कि इसके लिए जमीन ‘कैश्यू वर्कर्स यूनियन’ ने उपलब्ध कराई थी।
भुवनेश्वरन को लेकर बार-बार सवाल पूछे जाने पर सुधाकरन पत्रकारों पर भी नाराज हो गए।
मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना है और इस बारे में उनसे कोई राय नहीं मांगी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘समर्थन के लिए मैं कांग्रेस का आभारी रहूंगा। वे मेरी राय क्यों पूछेंगे? इस पर फैसला वही करेंगे।’’
सुधाकरन छह दशक से अधिक समय तक माकपा से जुड़े रहे और विधायक तथा मंत्री भी रहे।
बाद में उन्होंने जिला नेतृत्व द्वारा अपमान और सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ हमलों का आरोप लगाते हुए पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराने का फैसला किया था।
भाषा गोला वैभव
वैभव

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