अदालत ने जयपुर पोलो ग्राउंड खाली कराने के मामले में इंडियन पोलो एसोसिएशन को नहीं दी अंतरिम राहत
अदालत ने जयपुर पोलो ग्राउंड खाली कराने के मामले में इंडियन पोलो एसोसिएशन को नहीं दी अंतरिम राहत
नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने केंद्र सरकार के यहां रेस कोर्स इलाके में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड खाली करने के आदेश के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) को अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। इस फैसले से ग्राउंड को खाली कराने का रास्ता साफ हो गया है।
अदालत की वेबसाइट पर 12 जून के आदेश को शनिवार को अपलोड किया गया, जबकि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय के अधिकारियों ने 15.20 एकड़ क्षेत्रफल वाले जयपुर पोलो ग्राउंड पर कब्जा ले लिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा आईपीए द्वारा सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 की धारा 9(3) के तहत दायर उस आवेदन पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा बेदखली आदेश के क्रियान्वयन और अमल पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इसी प्रकार का अनुरोध पहले माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पीएचसी तथा दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, और अपीलकर्ता को कोई राहत प्रदान नहीं की गई थी। इसलिए, न्यायिक अनुशासन और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, मैं अगली तारीख तक भी आक्षेपित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के लिए इच्छुक नहीं हूं।”
अदालत ने हालांकि केंद्र सरकार को अपील और स्थगन आवेदन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 17 जून को अवकाशकालीन न्यायाधीश के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
यह विवाद लुटियंस दिल्ली में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने अदालतों को बताया है कि पोलो ग्राउंड और उसके आस-पास की जगहों (जिनमें दिल्ली जिमखाना क्लब भी शामिल है) की जमीन को जनहित के कामों के लिए अपने कब्ज़े में लेने का प्रस्ताव है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश होते हुए स्थायी वकील आशीष दीक्षित ने अपील और स्थगन आवेदन के जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
आईपीए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अक्षय मखीजा और दूसरे वकीलों ने हालांकि केंद्र की उस अपील का विरोध किया जिसमें उसने जवाब दाखिल करने के लिए सुनवाई टालने की मांग की थी। उन्होंने अदालत से अधिकारियों को अगली सुनवाई की तारीख तक बेदखली का आदेश लागू करने से रोकने का आग्रह किया और तर्क दिया कि ऐसा न करने पर अपील ही बेअसर हो जाएगी।
अदालत ने गौर किया कि 20 मई के बेदखली आदेश के खिलाफ अपील तीन जून को दायर की गई थी और प्रतिवादी को नोटिस जारी किया जा चुका था, जबकि उस चरण में कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई थी।
अगली सुनवाई तक अस्थायी संरक्षण के अनुरोध को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “न्यायिक अनुशासन और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, मैं अगली तारीख तक भी विवादित आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हूं।”
भाषा प्रशांत माधव
माधव

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