न्यायालय ने चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

न्यायालय ने चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

न्यायालय ने चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया
Modified Date: April 16, 2026 / 01:02 pm IST
Published Date: April 16, 2026 1:02 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने देश में मतदान को अनिवार्य बनाने के निर्देश देने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया और कहा कि ऐसा फैसला ‘‘नीतिगत क्षेत्र’’ में आता है और न्यायपालिका इसके लिए आदेश जारी नहीं कर सकती।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वह अपनी शिकायत संबंधित पक्षों के समक्ष रखें।

पीठ ने कहा कि जानबूझकर मतदान न करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान लागू करने और मतदान को अनिवार्य बनाने जैसी मांगों पर अदालत विचार नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जो लोग जानबूझकर मतदान नहीं करते, उनके लिए सरकारी सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि लोकतंत्र कानूनी दबाव से नहीं, बल्कि जन-जागरूकता से फूलता-फलता है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसे देश में, जो कानून के शासन पर चलता है और लोकतंत्र में विश्वास करता है और जहां हमने 75 वर्षों में इस पर भरोसा दिखाया है, हर व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह मतदान करने जाए। अगर वे नहीं जाते, तो नहीं जाते। जरूरत जागरूकता की है, हम उन्हें मजबूर नहीं कर सकते।’’

याचिकाकर्ता ने भी सुझाव दिया कि अदालत निर्वाचन आयोग को गैर-मतदाताओं के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने का निर्देश दे। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि घर पर रहने को अपराध कैसे बनाया जा सकता है।

सीजेआई ने पूछा, ‘‘क्या हम उनकी गिरफ्तारी का निर्देश दें? अगर कोई नागरिक मतदान करने नहीं जाता, तो हम क्या कर सकते हैं?’’

पीठ ने अनिवार्य मतदान कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का भी जिक्र किया और कहा कि चुनाव के दिन कई नागरिक अपने काम में व्यस्त रहते हैं, जिनमें न्यायाधीश भी शामिल हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर हम इसे स्वीकार कर लें, तो मेरे भाई न्यायमूर्ति बागची को कामकाजी दिन होने के बावजूद मतदान के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा।’’

इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘न्यायिक कार्य भी महत्वपूर्ण है।’’

पीठ ने समाज के कमजोर वर्गों की चिंता भी जताई।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई गरीब व्यक्ति कहे कि ‘मुझे अपनी मजदूरी कमानी है, मैं मतदान कैसे करूं?’ तो हम उन्हें क्या जवाब देंगे?’’

याचिकाकर्ता ने कहा कि निर्वाचन आयोग को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए, जो मतदान न करने वालों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव तैयार करे।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें आशंका है कि ये मुद्दे नीतिगत क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।’’

भाषा गोला माधव

माधव


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