शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों में जमानत याचिकाओं के जल्द निपटारे के उपाय सुझाए
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों में जमानत याचिकाओं के जल्द निपटारे के उपाय सुझाए
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) देशभर के उच्च न्यायालयों में लंबित जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने स्वतः सूचीबद्ध करने की व्यवस्था विकसित करने और ऐसे मामलों के निपटारे के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने जैसे उपाय का सोमवार को सुझाव दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि उसे उम्मीद और भरोसा है कि उच्च न्यायालय, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। अदालत ने कहा कि इससे जमानत याचिकाओं के समय पर निपटारे के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनेगी और साथ ही पीड़ितों के अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित होगी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को किसी भी उच्च न्यायालय के कामकाज पर आक्षेप के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए और सुझावों का उद्देश्य व्यवस्थागत दक्षता को मजबूत करना है।
न्यायालय ने यह आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें उसने पूर्व में सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को अग्रिम या नियमित जमानत से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं का पूरा विवरण भेजने का निर्देश दिया था। इसमें याचिका दाखिल होने की तारीख, निर्णय की तारीख या अगली सुनवाई की तारीख के साथ-साथ सजा निलंबन से संबंधित मामलों की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया था।
पीठ ने सोमवार को पारित अपने आदेश में कहा कि ज्यादातर उच्च न्यायालयों ने आंकड़े उपलब्ध कराए हैं और जमानत याचिकाओं के समय पर निपटान के लिए पहल की है।
पीठ ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित जमानत याचिकाओं की संख्या ‘‘बहुत अधिक’’ है, जबकि वहां के अधिकतर न्यायाधीश एक दिन में सैकड़ों मामलों का निपटारा कर रहे हैं।
पीठ ने जमानत याचिकाओं की सुनवाई के लिए तिथि सुनिश्चित करने के संबंध में एक तंत्र विकसित करने का अधिकार इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक समिति के विवेक पर छोड़ दिया। पीठ ने कहा कि ‘‘जमानत याचिकाओं को सूचीबद्ध किए जाने में प्राथमिकता दी जाए।’’
पीठ ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जहां जमानत याचिकाओं पर सुनवाई अक्सर लंबे समय तक स्थगित कर दी जाती है।
उच्चतम न्यायालय ने जमानत याचिकाओं के समय पर निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तुत किए गए कई सुझावों पर गौर किया।
पीठ ने कहा कि सुझावों के अनुसार, जमानत के मामलों को साप्ताहिक या पाक्षिक आधार पर सूचीबद्ध किया जा सकता है और एक स्वचालित सॉफ्टवेयर प्रणाली हो सकती है, जिसके द्वारा सभी जमानत याचिकाओं को कम से कम हर दो सप्ताह में एक बार सूचीबद्ध किया जा सके।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जमानत याचिका पर सुनवाई की पहली तारीख से पहले अनिवार्य रूप से एक वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए और आवेदन जांच एजेंसियों के वकील के कार्यालय को भेजा जाए।
पीठ ने कहा कि नोटिस जारी करने और जमानत याचिकाएं स्वीकार करने की प्रथा को समाप्त किया जाना चाहिए और ऐसी याचिकाओं की स्वतः सुनवाई होनी चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय जमानत याचिकाओं के निपटारे के लिए एक समयसीमा भी निर्धारित कर सकते हैं।’’
भाषा आशीष सुरेश
सुरेश

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