तमिलनाडु विधानसभा में अमोनिया रिसाव एवं मेकेदातु बांध विवाद को लेकर शोर-शराबा हुआ

तमिलनाडु विधानसभा में अमोनिया रिसाव एवं मेकेदातु बांध विवाद को लेकर शोर-शराबा हुआ

तमिलनाडु विधानसभा में अमोनिया रिसाव एवं मेकेदातु बांध विवाद को लेकर शोर-शराबा हुआ
Modified Date: June 22, 2026 / 04:21 pm IST
Published Date: June 22, 2026 4:21 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

चेन्नई, 22 जून (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को अमोनिया गैस रिसाव हादसे तथा मेकेदातु बांध पर चर्चा की विपक्षी दलों — द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की मांग नहीं माने जाने पर शोर-शराबा हुआ एवं अन्नाद्रमुक सदस्यों ने बहिर्गमन किया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष जे सी डी प्रभाकर ने श्रम कल्याण मंत्री जे. मोहम्मद फारवस को तिरुवल्लूर जिले में अमोनिया गैस रिसाव की घटना पर सरकारी वक्तव्य पढ़ने के लिए कहा। इस हादसे में पांच महिला श्रमिकों की मौत हो गई ।

सदन में इस दौरान विपक्षी दलों ने पहले इस विषय पर चर्चा कराने की मांग की।

अन्नाद्रमुक महासचिव एवं विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी कुछ कथित प्रक्रियागत उल्लंघनों का हवाला देते हुए 19 जून को विधानसभा से मेकेदातु बांध पर सर्वसम्मति से पारित किए गए प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति देने का अनुरोध किया।

लेकिन अध्यक्ष ने नियम 110 के तहत सरकारी वक्तव्य पढ़े जाने से पहले किसी भी चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने पहले ही पारित हो चुके प्रस्ताव पर चर्चा कराने से भी मना कर दिया, जिसके बाद सदन में तीखी बहस हुई।

जब मंत्री फारवस वक्तव्य पढ़ने लगे तो विपक्षी सदस्य लगातार हस्तक्षेप करने लगे। इस पर अध्यक्ष ने सदस्यों से शांति बनाए रखने और मंत्री को वक्तव्य पूरा पढ़ने देने को कहा।

लेकिन, पलानीस्वामी अपनी मांग पर अड़े रहे और अध्यक्ष के साथ उनकी बहस हो गई। अध्यक्ष ने सदस्यों को यह भी याद दिलाया कि सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हो रहा है और उन्हें मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

अध्यक्ष की व्यवस्था से असहमत अन्नाद्रमुक सदस्य सदन से उठकर चले गये। बाहर निकलते समय जब वे नारेबाजी करने लगे तो अध्यक्ष ने उन्हें विधानसभा के गलियारे में नारे लगाने के खिलाफ चेतावनी दी।

बाद में प्रभाकर ने कहा कि अन्नाद्रमुक संशोधित प्रस्ताव पढ़े जाने के समय ही अपनी आपत्ति दर्ज करा सकती थी।

उन्होंने कहा, ‘‘अब इस मुद्दे को उठाना वास्तविक विषय से ध्यान भटकाने जैसा है। हम कर्नाटक की प्रस्तावित बांध परियोजना का एकजुट होकर विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि पलानीस्वामी को कोई आपत्ति थी तो उन्हें शुक्रवार को ही सदन में अपनी बात रखनी चाहिए थी।’’

उन्होंने दोहराया कि वह तमिलनाडु के किसानों के हित में पारित किए गए इस प्रस्ताव पर अब किसी चर्चा की अनुमति नहीं दे सकते हैं।

विधानसभा परिसर के बाहर पलानीस्वामी ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने शून्यकाल के दौरान मेकेदातु बांध प्रस्ताव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया था, लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी कारण हमें बहिर्गमन करना पड़ा। हमें सदन के भीतर अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि संशोधित प्रस्ताव सदन को सहमति की जानकारी दिए बिना पारित किया गया, जो एक ‘प्रक्रियागत उल्लंघन’ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्नाद्रमुक मेकेदातु मुद्दे पर पारित संशोधित प्रस्ताव का समर्थन नहीं करती।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक संशोधन का सुझाव दिया था, जिसमें अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत मेकेदातु में कावेरी नदी पर प्रस्तावित संतुलन जलाशय परियोजना के निपटारे के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण गठित करने की मांग की गई थी। सदन ने इस संशोधन को स्वीकार कर लिया था।

भाषा

राजकुमार मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में