तमिलनाडु: द्रमुक के सहयोगी दल ने विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन छोड़ने की घोषणा की

तमिलनाडु: द्रमुक के सहयोगी दल ने विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन छोड़ने की घोषणा की

तमिलनाडु: द्रमुक के सहयोगी दल ने विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन छोड़ने की घोषणा की
Modified Date: March 22, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: March 22, 2026 6:21 pm IST

चेन्नई, 22 मार्च (भाषा) तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तमिलगा वझवुरिमाई काची ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) को छोड़ने की रविवार को घोषणा की। पार्टी के संस्थापक टी. वेलमुरुगन ने द्रमुक के ‘बड़े भाई’ वाले रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई है।

पनरुति (कुड्डालोर जिला) विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक वेलमुरुगन ने पत्रकारों से कहा कि अपनी पार्टी की ‘उपेक्षा’ से नाखुश होकर भी उन्होंने यह फैसला लिया।

वेलमुरुगन ने कहा, ‘‘सीट बंटवारे की बातचीत के दौरान हमें बताया गया था कि विधानसभा चुनाव के लिए हमें एक सीट आवंटित की जाएगी। हम सामाजिक न्याय सहित कई मांगें उठाते रहे हैं। हमसे पूछा गया कि जब अन्य दल कोई मांग नहीं कर रहे हैं, तो आप ऐसी मांगें क्यों कर रहे हैं।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘मैं सरकार से बार-बार कुछ मांगें पूरी करने का आग्रह करता रहा हूं। लेकिन द्रमुक इसे नजरअंदाज करती रही है।’’

भविष्य के कदम के बारे में उन्होंने कहा कि उनका संगठन तमिलनाडु में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल नहीं होगा और उन्होंने संकेत दिया कि वह एक गठबंधन बनाने के लिए कुछ दलों से बातचीत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम द्रमुक की वार्ता समिति के समक्ष अपनी मांगें रखते आ रहे हैं। मैं यह सूचित करता रहा हूँ कि सीटों के आवंटन को लेकर कोई समस्या नहीं थी, लेकिन इन मांगों को पूरा करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए।’’

वेलमुरुगन ने याद दिलाया कि वह कई वर्षों से विधानसभा में इन्हीं मांगों को लेकर बोलते आ रहे हैं और आरोप लगाया कि ‘‘द्रमुक के नेतृत्व वाली सरकार ने उनकी परवाह नहीं की।’’

वेलमुरुगन ने दावा किया कि सीट बंटवारे की बातचीत के दौरान द्रमुक की चुनाव समिति ने ‘‘बड़े भाई वाला रवैया’’ अपनाया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें बताया गया कि जब कांग्रेस, कम्युनिस्ट और एमडीएमके सहित राजनीतिक दलों ने ऐसी कोई मांग नहीं रखी, तो एक विधायक और एक छोटे दल के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने हमें इस योग्य नहीं समझा कि हम ऐसी मांगें रखें और उन्हें पूरा करने के लिए कहें।’

वेलमुरुगन ने आरोप लगाया कि उन्होंने कुछ अधिकारियों पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके मंत्रियों से शिकायत करने का आरोप लगाया है कि वह लगातार सरकार को ‘‘परेशान कर रहे हैं’’।

उन्होंने सवाल उठाया कि द्रमुक सरकार राज्य में जातिगत गणना कराने से क्यों इनकार कर रही है।

उन्होंने पूछा, ‘‘द्रमुक सामाजिक न्याय के खिलाफ ताकतों को साथ रखते हुए सामाजिक न्याय के मार्ग पर कैसे चल सकती है? जब ओडिशा, बिहार जैसे राज्यों में जातिगत गणना हुई, तो द्रमुक ने मेरी आवाज का सम्मान क्यों नहीं किया?’’

भाषा यासिर दिलीप

दिलीप


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