माकपा और विद्रोही नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग तेज

माकपा और विद्रोही नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग तेज

माकपा और विद्रोही नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग तेज
Modified Date: March 21, 2026 / 04:42 pm IST
Published Date: March 21, 2026 4:42 pm IST

अलप्पुझा (केरल), 21 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एवं उसके बागी नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।

मंत्री साजी चेरियन ने आरोप लगाया कि माकपा के पूर्व नेता जी सुधाकरन में राजनीतिक नैतिकता की कमी है और इस संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस नेता के सुधाकरन का उदाहरण दिया।

चेरथला में चेरियन ने एक चुनावी सभा में कहा कि अंबलप्पुझा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे जी सुधाकरन ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है।

उन्होंने जी सुधाकरन की तुलना कांग्रेस सांसद के सुधाकरन से करते हुए कहा कि टिकट न मिलने के बावजूद के सुधाकरन ने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।

चेरियन ने कहा, “के सुधाकरन ने पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया। यही राजनीतिक नैतिकता है। उन्हें टिकट नहीं मिला, विवाद भी हुआ लेकिन अंतत: उन्होंने पार्टी के फैसले का सम्मान किया।”

उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के दौरान “चमत्कार” के उसके दावे अलप्पुझा में जी सुधाकरन के माकपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के रूप में सामने आए हैं।

चेरियन ने कहा, “उन्होंने कहा था कि अलप्पुझा में माकपा खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होगा। हमारी पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता कांग्रेस के तथाकथित चमत्कार का हिस्सा नहीं बनेगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह स्वयं भी जी सुधाकरन की तरह पार्टी छोड़ दें, तो उनकी पत्नी तक उनका साथ नहीं देगी।

बागी नेता पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि माकपा द्वारा पद और जिम्मेदारियां देने के बावजूद संगठन के साथ विश्वासघात नहीं किया जाना चाहिए था।

इससे पहले, मुख्यमंत्री पिनारई विजयन और अलप्पुझा के माकपा नेताओं ने भी सुधाकरन के चुनाव लड़ने के फैसले को पार्टी के साथ विश्वासघात करार दिया था।

दूसरी ओर, सुधाकरन का कहना है कि पार्टी अब ‘राजनीतिक अपराधियों’ के हाथों में है।

भाषा

राखी राजकुमार

राजकुमार


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