बंगाल की तृणमूल सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: शाह
बंगाल की तृणमूल सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: शाह
(फोटो के साथ)
बैरकपुर/सिलीगुड़ी, 31 जनवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर शनिवार को तीखा हमला बोलते हुए उस पर घुसपैठियों को संरक्षण देने, सामाजिक तनाव बढ़ाने और चुनावी लाभ के लिए जानबूझकर सीमा सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया।
शाह ने दावा किया कि देश में कोई भी सरकार टीएमसी सरकार जितनी “भ्रष्ट” नहीं है।
गृह मंत्री ने दक्षिण और उत्तर बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं की सभाओं को संबोधित करते समय पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव को एक सामान्य राजनीतिक मुकाबले से कहीं अधिक बताया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सुशासन और बंगाली अस्मिता को लेकर जनमत संग्रह करार दिया।
शाह ने कहा कि घुसपैठ, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), कथित घोटालों और राज्य में बढ़ते सामाजिक विभाजन को लेकर भाजपा ने टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए अपना आक्रामक अभियान तेज कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “वोट बैंक की राजनीति” के चलते टीएमसी सरकार में भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध घुसपैठ बेकाबू हो गई है।
बैरकपुर में कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “जिस तरह पश्चिम बंगाल में घुसपैठ हो रही है, वह पूरे देश के लिए सुरक्षा संबंधी मुद्दा बन गया है। अदालत के आदेशों के बावजूद टीएमसी सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) को जमीन नहीं दे रही, क्योंकि घुसपैठिये ही उसका ‘वोट बैंक’ हैं।”
उन्होंने दावा किया कि अवैध प्रवासियों को खुलेआम घूमने दिया जा रहा है और “प्रशासन व पुलिस आंखें मूंदे हुए हैं।”
शाह ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीमा पर बाड़बंदी के लिए आवश्यक जमीन देने में सहयोग नहीं कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “लेकिन मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं, ममता बनर्जी उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार 31 मार्च तक जमीन दें या न दें, अप्रैल में भाजपा की सरकार बनते ही 45 दिनों में मुख्यमंत्री बीएसएफ को जमीन सौंप देगा।”
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह नौ सीमावर्ती जिलों में पहले से अधिग्रहीत जमीन 31 मार्च तक बाड़ लगाने के लिए सौंपे।
अदालत ने यह भी कहा है कि बांग्लादेश से लगी भारत की कुल सीमा का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम बंगाल में है और 2016 से कई कैबिनेट फैसलों के बावजूद बड़े हिस्से अब भी बाड़ रहित हैं।
मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर शाह ने राज्य सरकार पर निर्वाचन आयोग के काम में बाधा डालने और सहयोग न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी एसआईआर का चाहे जितना विरोध करें, लेकिन यह होगा और मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाए जाएंगे।”
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारी जानबूझकर निर्वाचन आयोग के साथ सहयोग नहीं कर रहे।
उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी डर क्यों रही हैं? क्योंकि एसआईआर लागू होते ही घुसपैठियों को जाना पड़ेगा।”
शाह ने कोलकाता के पास आनंदपुर में मोमो फैक्टरी से जुड़े गोदामों में हाल ही में लगी आग को लेकर भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह त्रासदी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का नतीजा है।
गृह मंत्री ने कहा, “मैं आनंदपुर अग्निकांड में जान गंवाने वाले सभी मजदूरों को श्रद्धांजलि देता हूं। लेकिन मैं साफ कह देना चाहता हूं कि यह आग कोई दुर्घटना नहीं थी। ममता बनर्जी सरकार का भ्रष्टाचार ही इसकी वजह है।”
उन्होंने सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक मंत्री “32 घंटे बाद” घटनास्थल पर पहुंचे।
शाह ने सवाल किया, “क्या बंगाल में प्रशासन पूरी तरह से खत्म हो गया है?” उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पीड़ित किसी “विशेष समुदाय” से होते, तो प्रतिक्रिया अलग होती।
शाह ने मांग की कि मुख्यमंत्री इस घटना की गहन जांच के आदेश दें और दोषियों को जेल भेजा जाए।
उत्तर बंगाल में शाह ने सियासी हमले और तेज करते हुए कहा कि टीएमसी शासन में भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने कहा, “देश में ममता बनर्जी की सरकार से ज्यादा भ्रष्ट कोई सरकार नहीं है। बंगाल में भ्रष्टाचार को संस्थागत बना दिया गया है।”
शाह ने दावा किया कि केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के फंड को सिंडिकेट के जरिये हड़प लिया गया।
उन्होंने ममता को खुली चुनौती देते हुए कहा, “अगर आप भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करती हैं, तो गिरफ्तार किए जा चुके या आरोपों का सामना कर रहे 23 दागी नेताओं को टिकट मत दीजिए। लेकिन वह टिकट देंगी, क्योंकि अगर नहीं देंगी, तो वे फाइलें खोल देंगे।”
टीएमसी पर समुदायों को आपस में लड़ाने का आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि बंगाल में सामाजिक सौहार्द पूरी तरह से नष्ट हो चुका है।
उन्होंने कहा, “ममता जी ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा लेकर आई थीं। आज मैं कह सकता हूं कि आपसे तो वामपंथी भी बेहतर थे। आपने गोरखा लोगों को बंगालियों से लड़वाया, आदिवासियों को कुर्मियों से लड़वाया, राजबंशियों को आदिवासियों और बंगालियों से लड़वाया। आंतरिक संघर्ष और सामाजिक तनाव पैदा करने के अलावा आपने कुछ नहीं किया।”
शाह ने ममता पर तंज कसते हुए कहा कि उनके राज में “मां असुरक्षित है, मानुष पीड़ित है और माटी निगल ली गई है।”
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि ममता के शासन में महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करतीं, आम लोग सिंडिकेट के दबाव में जी रहे हैं और जमीन पर घुसपैठियों का कब्जा हो रहा है।
चुनावों से पहले शरणार्थी समुदायों को साधने की कोशिश के तहत शाह ने मतुआ और नामशूद्र समुदायों से संपर्क किया, जो नागरिकता की बहस में अहम रहे हैं और 2019 से भाजपा का समर्थन कर रहे हैं।
एसआईआर को लेकर उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि टीएमसी नागरिकता के मुद्दे पर शरणार्थी समुदायों को डराने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “टीएमसी मतुआ और नामशूद्रों को डरा रही है। मैं उनसे कहना चाहता हूं डरने की जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी आपके वोटों को छू भी नहीं सकतीं।”
शाह ने टीएमसी के शासनकाल में अर्थव्यवस्था में गिरावट का भी आरोप लगाया और कहा कि 2011 से 2025 के बीच पश्चिम बंगाल से 6,900 कंपनियां या तो बंद हो गईं या राज्य छोड़कर चली गईं। उन्होंने कहा कि इनमें 110 सूचीबद्ध कंपनियां शामिल हैं।
शाह ने कहा, “2026 वह साल है, जब टीएमसी को ‘टाटा, बाय-बाय’ कहने का समय आ गया है।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से टीएमसी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने और बंगाल में “देशभक्तों व राष्ट्रवादियों की सरकार” बनाने का आह्वान किया।
भाषा जोहेब पारुल
पारुल

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