आदिवासी नेताओं ने गोवा विधानसभा में एसटी आरक्षण देने में देरी पर आंदोलन की चेतावनी दी

आदिवासी नेताओं ने गोवा विधानसभा में एसटी आरक्षण देने में देरी पर आंदोलन की चेतावनी दी

आदिवासी नेताओं ने गोवा विधानसभा में एसटी आरक्षण देने में देरी पर आंदोलन की चेतावनी दी
Modified Date: May 11, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: May 11, 2026 8:42 pm IST

पणजी, 11 मई (भाषा) गोवा में आदिवासी नेताओं ने सोमवार को कहा कि प्रमोद सावंत सरकार को अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए राज्य विधानसभा में सीटें आरक्षित करने के संबंध में केंद्र सरकार से संपर्क करना चाहिए।

आदिवासी नेता गोविंद शिरोडकर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र को एक अध्यादेश जारी करना चाहिए जो भारत निर्वाचन आयोग को सीटें आरक्षित करने का अधिकार दे।

पिछले साल अगस्त में, संसद ने ‘गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक, 2024’ पारित किया था, जिसका उद्देश्य राज्य की लगभग 10.23 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना था।

हालांकि वर्तमान में 40 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए कोई आरक्षित सीट नहीं है, लेकिन यह कानून आरक्षण लागू करने के लिए सीमा निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करता है।

कानून लागू होने के बाद, विधानसभा की चार सीटें अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित हो जाएंगी। पेरनेम सीट वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है।

शिरोडकर ने दावा किया, ‘गोवा में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि ये चुनाव इसी साल दिसंबर में हो सकते हैं। इसे देखते हुए, अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित होने की संभावना कम ही लगती है। राज्य के जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तावडकर की तरफ से भी इस मुद्दे पर कोई स्पष्टता नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार अध्यादेश लाने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क नहीं करती है, तो हम आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। हम दो दिन इंतजार करेंगे, जिसके बाद हम विधानसभा में सीटों के आरक्षण के लिए राज्य में आंदोलन करेंगे।’

तावडकर से इस मामले पर टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका।

भाषा

राखी संतोष

संतोष


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