भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर राज्यसभा में स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई श्रद्धांजलि

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भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर राज्यसभा में स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई श्रद्धांजलि

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 01:30 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 01:30 PM IST

नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

उच्च सदन के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि नौ अगस्त, 2026 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण पड़ाव ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि नौ अगस्त, 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन ने देश की आजादी की लड़ाई को निर्णायक गति प्रदान की थी।

उन्होंने कहा कि ‘करो या मरो’ के आह्वान ने देशभर के लाखों भारतीयों को सभी बाधाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने और राष्ट्र की स्वतंत्रता के साझा लक्ष्य के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

सभापति ने कहा कि गंभीर दमन, जेल और अनेक कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों ने असाधारण साहस, दृढ़ संकल्प और भारत की आजादी के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई। ‘‘उनके निस्वार्थ बलिदान और दृढ़ इच्छाशक्ति ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया तथा 1947 में देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया।’’

राधाकृष्णन ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल सभी लोगों और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वालों को सम्मानपूर्वक याद किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के देशभक्ति, एकता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण के आदर्श आज भी मजबूत, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के सामूहिक प्रयासों में हमें प्रेरित करते हैं।

सभापति ने कहा कि ‘‘करो या मरो’’ के नारे के साथ भारतीयों ने आजादी के लिए जो संघर्ष किया उसकी वजह से ही हम आज आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।

इसके बाद सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के सम्मान में अपने कुछ क्षण का मौन रखा

भाषा मनीषा माधव

माधव