तृणमूल कांग्रेस ने घुसपैठियों को मतदाता के रूप में शामिल करने की साजिश रची: फडणवीस

तृणमूल कांग्रेस ने घुसपैठियों को मतदाता के रूप में शामिल करने की साजिश रची: फडणवीस

तृणमूल कांग्रेस ने घुसपैठियों को मतदाता के रूप में शामिल करने की साजिश रची: फडणवीस
Modified Date: April 17, 2026 / 02:37 pm IST
Published Date: April 17, 2026 2:37 pm IST

कोलकाता, 17 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की साजिश रची थी।

उन्होंने ध्यान दिलााया कि तृणमूल जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) पर आपत्ति जता रही है, वहीं जिनके नाम ‘उचित कारणों’ से हटाए गए वे लोग कोई विरोध नहीं कर रहे हैं।

फडणवीस ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एसआईआर में मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं।

उन्होंने कहा, “जिनके नाम उचित कारणों से हटाए गए थे, उन्होंने विरोध नहीं किया फिर तृणमूल कांग्रेस को ही क्यों आपत्ति है? उच्चतम न्यायालय ने भले ही विशेष गहन पुनरीक्षण पर कुछ टिप्पणियां की है लेकिन इसे रोका नहीं। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस पूरी प्रक्रिया को रोकना चाहती थी।”

उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण में संवैधानिक प्रावधान हैं जिसके तहत पीड़ित व्यक्ति न्याय मांग सकता है तथा कानूनी सहारा ले सकता है तथा वह इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हैं।

फडणवीस ने कहा कि इस प्रकार की प्रक्रिया हर 10 वर्ष में की जानी चाहिये ताकि मृत, स्थानांतरित और अनधिकृत मतदाताओं के नाम हटाए जा सके।

उन्होंने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर आगामी विधानसभा चुनावों में ‘धोखाधड़ी के साधनों’ से जीतने के उदेश्य से इसका विरोध करने का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस द्वारा महाराष्ट्र जैसे भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों पर हमले होने के आरोपों को फडणवीस ने बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि यह जांच कराया जाना उचित रहेगा कि काम की तलाश में लोग पश्चिम बंगाल से बाहर क्यों जा रहे हैं।

फडणवीस ने कहा, ‘यदि बंगाल के लोगों को हर तरह के काम के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है, तो राज्य सरकार को शर्मिंदा होना चाहिए। यह सरकार की विफलता को दर्शाता है। मैं केवल ऊंची नौकरियों की बात नहीं बल्कि हर तरह के काम की बात कर रहा हूँ।”

उन्होंने कहा कि पुणे, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में समृद्ध बंगाली समुदाय हैं जो दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे त्योहारों को कोलकाता के पंडालों के समान भव्य तरीके से मनाते हैं।

भाषा माधव

माधव


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